फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ghazipur News: पितृपक्ष कल से, पितराें को करेंगे तृप्त

विज्ञापन
विज्ञापन
-14 अक्तूबर को होगा समाप्त, श्राद्ध एवं तर्पण से होती है अभीष्ट की प्राप्ति
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष से प्रारंभ होकर अमावस्या तक के 16 दिनों की अवधि पितृ पक्ष यानि श्राद्ध पक्ष कहलाती है, जो इस बार 29 सितंबर से शुरू होकर 14 अक्तूबर को समाप्त होगा।
पंडित दीपक मिश्रा के मुताबिक हिंदू धर्म पुनर्जन्म की अवधारणा में विश्वास रखता है। ऐसी मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान पितृ अर्थात पूर्वज जो अपना देह त्याग चुके होते हैं, पृथ्वी लोक पर अपने सगे-संबंधी और परिवार के लोगों से अपनी मुक्ति और भोजन लेने के लिए मिलने आते हैं।
विज्ञापन

वास्तव में अपने पूर्वजों के निमित्त श्रद्धापूर्वक किया हुआ कार्य ही श्राद्ध है। वे बताते हैं कि वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब सूर्य का प्रवेश कन्या राशि में होता है तो, उसी दौरान पितृपक्ष मनाया जाता है। पंचम भाव हमारे पूर्व जन्म के कर्मों के बारे में इंगित करता है और काल पुरुष की कुंडली में पंचम भाव का स्वामी सूर्य माना जाता है। इसलिए सूर्य को हमारे कुल का द्योतक भी माना गया है।
इस वर्ष पितृपक्ष का आरंभ 30 सितंबर शनिवार से होगा जबकि पितृ विसर्जन 14 अक्तूबर शनिवार को है l मातृ नवमी 08 अक्तूबर रविवार को पड़ेगी, जो व्यक्ति अपने पितरों को तिल मिश्रित जल की तीन अंजलियां प्रदान करते हैं, उनके द्वारा उनके जन्म से तर्पण के दिन तक के सभी पापों का अंत हो जाता है। पितरों को तृप्ति प्रदान करने के उद्देश्य से विभिन्न देवताओं ऋषियों तथा पितृ देवों को तिल मिश्रित जल अर्पित करने की क्रिया ही तर्पण कहलाती है।
विज्ञापन


तुलसी का है विशेष महत्व
पंडित गोविंद पांडेय के मुताबिक श्राद्ध में तुलसी का विशेष महत्व है, जो पितरों के पिंड में तुलसी मिलाकर दान करता है उसके दिए हुए एक पिंड से पितरों को सौ वर्षो तक तृप्ति बनी रहती है l श्राद्ध एवं तर्पण से दुःखों का अंत हो जाता है तथा अभीष्ट कामनाओं की पूर्ति होती है l
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें