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कोरोना के बीच होगा तर्पण और पिंडदान

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गाजीपुर। पितरों को तृप्त किए जाने वाले पितृ पक्ष की शुरुआत बुधवार से हो रही है। पखवाड़ाभर तक चलने वाले पितृपक्ष पर कोरोना संक्रमण काल का भी असर रहेगा। इस बार कार्यक्रम जहां घरों पर ही संपन्न कराए जाएंगे जबकि इसे सीमित भी रखा जाएगा। पितृपक्ष में पितरों को पिंडदान तथा तर्पण किया जाता है। मान्यता है कि पिता धन देते हैं, पितामह धन पुत्र देते हैं तथा वृद्ध पितामह आरोग्य बनाते हैं। पितृपक्ष में कुल-खानदान के पितर पृथ्वी पर आ जाते हैं। ऐसे में परिजन उन्हें पिंडदान कर तृप्त करते हैं। अपने वंशजों से पिंड प्राप्त करने के बाद पितर तृप्त होकर स्वर्ग लोक चले जाते हैं। एक पखवारे तक चलने वाले कार्यक्रम के आयोजन में परिजन खोवा आदि का पिंड बनाकर मंत्रोच्चार के बीच पितरों का आह्वान करते हैं। इसके बाद पिंडदान कर उनसे तृप्त होने की आशा के साथ आशीर्वाद मांगते हैं। पिंडदान के बाद कौवा, गाय तथा कुत्ता आदि के लिए घर से ग्रास निकालकर उन्हें खिलाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि पितर लोग किसी भी जीव के रूप में आ सकते हैं। जिलेभर में गंगा घाटों सहित, स्वच्छ स्थानों तथा घरों में लोग पिंडदान करते हैं। पंडित शिवानंद तिवारी बताते हैं कि घर में हुई मौत के बाद अगर उस पूर्वज का गया, बद्रीनाथ आदि स्थान पर पिंडदान न कराया जाए तो वह पूरी तरह से तृप्त नहीं होते हैं। पितृपक्ष में ऐसे पूर्वज पिंड लेने के लिए धरती पर चले आते हैं। शास्त्रों में मनुष्य के तीन देव ऋण, ऋषि ऋण और पितृ ऋण प्रमुख है। यह तीनो ऋण पितरों को श्राद्ध दे कर उतारे जा सकते हैं।
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