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जान हथेली पर रखकर गुजरते हैं लोग

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भीमापार। स्थानीय बाजार से माहपुर जाने वाली सड़क अब खतरनाक हो चुकी है। इस रास्ते से गुजरना अब जानलेवा हो गया है। मार्ग की मरम्मत की मांग कईं बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने उठाई गई लेकिन जिम्मेदार लोगों की उदासीनता से सड़क की मरम्मत या पुर्ननिर्माण कार्य नहीं किया जा सका। इससे क्षेत्र के लोगों में रोष है। भीमापार बाजार-माहपुर मार्ग अब तालाब का रूप ले चुका है। अधिकांश लोगों ने इस सड़क पर आवागमन बंद कर दिया है। बावजूद इसके कुछ दुकानदारों और राहगीरों की इसी सड़क से होकर गुजरना मजबूरी है। भीमापार बाजार से माहपुर को जाने वाली सड़क का अधिग्रहण लोक निर्माण विभाग ने लगभग बीस वर्ष पहले किया था। इस सड़क की कुल लंबाई लगभग छह किलोमीटर है। तत्कालीन समय में बनाई गई सड़क बाजार से सटकर एक किलोमीटर दूरी तक जर्जर हो चुकी है। सड़क छोटे-बड़े सैकड़ों गड्ढों में तब्दील है। हल्की बारिश में भी सड़क पर जलजमाव हो जाता है। कई बार बारिश के चलते पूरी की पूरी सड़क ही तालाब का रूप अख्तियार कर लेती है। खास बात यह है कि इसी सड़क से आगे जाकर माहपुर रेलवे स्टेशन भी पड़ता है जिससे गुजरकर रेलवे स्टेशन तक पहुंच पाने में रेल यात्रियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। लोगों ने बताया कि इस सड़क की मरम्मत पर आज तक जिम्मेदारों की निगाह नहीं पहुंची। सड़क के दोनों तरफ बसे अधिकांश मकानों और दुकानों से निकली नालियों का गंदा पानी भी इसी मार्ग पर पहुंच जाने से स्थिति और अधिक भयावह हो जा रही है। भीमापार बाजार के चंदन गुप्ता, रतन गुप्ता, अर्जुन गुप्ता, संजय यादव और दीपक यादव आदि ने इस मार्ग की जल्द से जल्द मरम्मत की मांग जिला प्रशासन से की है।
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