जनपद चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिदिन आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में वर्ष 2023 से पैरामेडिकल के तीन कोर्सों की पढ़ाई शुरू हो जाएगी। इसमें डिप्लोमा इन मेडिकल लैब, ओटी और एक्स-रे टेक्नीशियन के कोर्स शामिल हैं। इन तीनों कोर्स के लिए 20-20-20 सीट उपलब्ध होगी। वहीं 40 सीट के साथ नर्सिंग कॉलेज भी शुरू हो जाएगा। जिससे छात्र इन कोर्सों की पढ़ाई कर अपने भविष्य को संवारेंगे, वहीं पैरामेडिकल कर्मियों की कमी भी समाप्त हो जाएगी।
नगर के आरटीआई मैदान में स्थापित महर्षि विश्वामित्र मेडिकल कॉलेज से एक तरफ जहां डॉक्टरों की टीम निकलेगी वहीं अब नर्सिंग कॉलेज और पैरामेडिकल जैसे चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले कोर्सों की पढ़ाई से जनपद अछूता नहीं रहेगा। वजह चिकित्सा क्षेत्र में इस क्षेत्र की पढ़ाई करने के लिए निजी विद्यालयों में काफी पैसा खर्च करना पड़ता है। यहीं नहीं छात्रों को इसकी शिक्षा ग्रहण करने के लिए गैर प्रांतों का सहारा लेना पड़ता था। ऐसे में एक सामान्य परिवार और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को इसकी पढ़ाई के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगाना पड़ता था। चिकित्सा के क्षेत्र में पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए अब कालेज प्रशासन ने ठोस कदम उठाना शुरू कर दिया है। एक तरफ जहां 40 सीट के नर्सिंग कालेज की स्थापित कराने की कवायद तेज कर दी गई है। वहीं पैरामेडिकल के तीन कोर्स डिप्लोमा इन मेडिकल लैब टेक्नीशियन में 20 सीट, डिप्लोमा इन ओटी टेक्नीशियन 20 सीट और डिप्लोमा इन एक्स-रे टेक्नीशियन के 20 सीट उपलब्ध होंगे। नीट के माध्यम से प्रवेश परीक्षा देकर छात्र इन कोर्सों की शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं। इस संबंध में मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य प्रोफेसर डा. आनंद मिश्रा ने बताया कि 2023 में नर्सिंग कालेज के साथ पैरामेडिकल के तीन कोर्स शुरू हो जाएंगे।
डेंगू वार्ड से लैस हुआ अस्पताल
जिला अस्पताल में डेंगू वार्ड स्थापित करा दिया गया है। वार्ड को दस बेड से सुसज्जित किया गया है। सीएमएस डा. राजेश सिंह ने बताया कि डेंगू मरीज तो नहीं मिल रहे हैं, लेकिन एहतियात के तौर पर जिला अस्पताल में वार्ड बना दिया गया है, जिससे मरीजों को भर्ती करके उनका उपचार कराया जा सका। इसके अलावा दवा और जांच की भी व्यवस्था भी बेहतर की गई है। वहीं 15 बेड का नया मेडिकल वार्ड भी संचालित किया जा रहा है।
अब तक 250 मरीजों का हो चुका है डायलिसिस
जिला अस्पताल के तीसरे तल पर स्थापित डायलिसिस यूनिट लोगों के सुविधा का केंद्र बन गया है। करीब एक माह में गुर्दा रोग से पीड़ित 250 मरीजों का डायलिसिस किया जा चुका है। यूनिट न होने से यहां के किडनी बीमारी से पीड़ित मरीजों को वाराणसी और अन्य जनपदों का सहारा लेना पड़ता था।