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अधूरे थे कागजात, अवैध अस्पताल सील

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सेवराई में संचालित अवैध अस्पतालों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सोमवार की दोपहर एसडीएम राजेश प्रसाद चौरसिया के नेतृत्व में अभियान चलाया। इस दौरान छह अस्पतालों का निरीक्षण किया गया। इसमें एक अस्पताल के कागजात पूर्ण नहीं होने पर उसे सील कर दिया गया।
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सेवराई एसडीएम के नेतृत्व में भदौरा बस स्टैंड और बड़ी नहर के पास स्थित करीब आधा दर्जन अस्पतालों का स्वास्थ्य विभाग की टीम ने निरीक्षण किया। इसमें बड़ी नहर स्थित एक निजी नर्सिंग होम को होमियोपैथ की डिग्री पर जच्चा बच्चा केंद्र संचालित किए जाने एवं कई साल पूर्व ही पंजीकरण निरस्त होने के बावजूद अस्पताल चलाने पर सील कर दिया गया। वहीं भदौरा बस स्टैंड पर संचालित करीब तीन अस्पतालों का निरीक्षण किया गया, जिसमें कागजात पूर्ण पाए गए।
इस संबंध में प्रभारी चिकित्साधिकारी सामुदायिक स्वास्थ केंद्र भदौरा डा. धनंजय आनंद ने बताया कि एसडीएम राजेश प्रसाद चौरसिया के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की तीन सदस्यीय टीम ने तहसील मुख्यालय के करीब छह अस्पतालों का निरीक्षण किया। इनमें वाराणसी पैथोलॉजी रिसर्च सेंटर एवं क्लीनिक के पास वैध कागज ना होने के कारण सीज कर दिया गया। क्लीनिक में होम्योपैथ की डिग्री पर जच्चा बच्चा केंद्र संचालित किया जा रहा था, जिनके खिलाफ गहमर कोतवाल में मुकदमा दर्ज कराया गया। जांच टीम में गहमर कोतवाल पवन उपाध्याय, स्वास्थ्य विभाग से चीफ फार्मासिस्ट अवध नारायण सिंह, मुकेश कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।
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निजी आंख अस्पताल की जांच, नहीं मिले डाक्टर
कासिमाबाद। उपजिलाधिकारी कासिमाबाद ने एक शिकायत पर सोमवार को कस्बे के एक निजी आंख अस्पताल की जांच की। जांच की खबर जैसे ही कस्बे के अन्य झोलाछाप चिकित्सकों को मिली, सभी अपना-अपना अस्पताल बंदकर फरार हो गए।
उप जिलाधिकारी वीरबहादुर यादव ने बताया कि एक व्यक्ति की शिकायत पर कासिमाबाद यूसुफपुर मार्ग पर स्थित एक नेत्रालय पर सोमवार की देर शाम जांच की गई। इस दौरान वहां कोई चिकित्सक मौजूद नहीं मिला। हालांकि कर्मचारियों ने बताया कि डाक्टर किसी कार्य से वाराणसी गए हुए हैं। इस पर निर्देश दिया कि सभी कागजात के साथ चिकित्सक अपना शीघ्र स्पष्टीकरण दें।
उपजिलाधिकारी ने बताया कि अस्पताल के प्रपत्रों की जांच के बाद ही पता चलेगा कि शिकायत सही है या गलत है। मालूम हो कि कासिमाबाद क्षेत्र में दर्जनों निजी अस्पताल झोलाछाप डॉक्टर चला रहे हैं। यही नहीं आसपास के क्षेत्रों में दो दर्जन से भी अधिक झोलाछाप चिकित्सकों के बड़े-बड़े अस्पताल संचालित हैं। इन अस्पतालों पर जिले से लेकर तहसील प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
अभी हाल ही में थाना क्षेत्र के धरवार कला गांव स्थित एक अस्पताल में प्रसव के दौरान गलत इंजेक्शन लगाने से एक प्रसूता की मौत हो गई थी। इसको लेकर परिजनों ने काफी हंगामा किया था। इस मामले में पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद ही मामला शांत हुआ था। जांच टीम के साथ प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. राजेश कुमार, प्रभारी निरीक्षक कमलेश पाल आदि मौजूद थे।
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