कासिमाबाद। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में शासन की ओर से जारी नई आरक्षण व्यवस्था से विकासखंड की तस्वीर अभी से बदली-बदली नजर रही है। विकासखंड में 1995 से दर्जनों ऐसी ग्राम पंचायतें हैं जो अधिकांश पिछड़ी जाति या अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रही हैं। इस बार तस्वीर पूरी तरह से उलट गई है। यही कारण है कि इस बार के चुनाव में तमाम महारथी बिना घमासान किए ही धराशायी हो गए हैं। मालूम हो कि विकासखंड में 2015 से पूर्व कुल 84 ग्राम पंचायतें थीं। नए परिसीमन और आरक्षण व्यवस्था में 15 ग्राम पंचायतें 2015 में नई बनाई गई थी। ऐसे में विकासखंड में कुल 99 ग्राम पंचायतें अस्तित्व में आई। इस बार की आरक्षण व्यवस्था में जयरामपुर भगवल अनुसूचित जनजाति की महिला के साथ सलेमपुर एवं जीयनपुर ग्राम पंचायतें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित की गई है। इसी तरह अनुसूचित महिला के लिए आठ एवं 14 सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित की गई है। इस बार नौ सीट पिछड़ी जाति महिला के लिए तो 18 पिछड़ी जाति के लिए आरक्षित की गई है। यहां पर 15 सीट महिलाओं के लिए आरक्षित है तो 32 सीट अनारक्षित रखी गई है। ब्लाक में सबसे ज्यादा चर्चा अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित तीन सीटों के लिए हो रही है। चर्चा है कि जिले में अनुसूचित जनजाति के लोगों का जाति प्रमाण पत्र शासन द्वारा नहीं बनाए जाने का आदेश है। इस आदेश के तहत इन तीनों ग्राम पंचायतों के उम्मीदवारों को जाति प्रमाण पत्र बनवाने में दिक्कतें आएंगी। तहसीलदार विराग पांडेय ने बताया कि 1356 से 59 फसली की खतौनी के साथ टीसी, अंक प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नकल एवं शपथ पत्र देने के बाद इन जातियों के लिए जाति प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे।