गाजीपुर। धनतेरस से भैया दूज तक चलने वाले दीपावली पर्व को पंच महापर्व कहते हैं। इस पंच महापर्व का पहला पर्व धनतेरस को पड़ता है, जबकि दूसरा चतुर्दशी को हनुमान जयंती, तीसरा अमावस्या को दीपावली का पर्व, चौथा कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को अन्नकूट व पांचवां पर्व द्वितीया को भैया दूज के रूप में मनाया जाता है।
पंडित दीपक मिश्रा के मुताबिक पूजन-अर्चन के लिए इन पांचों पर्वों का बहुत महत्त्व है। शास्त्रों में संपूर्ण कार्तिक मास में दीपदान का विशेष महत्व बताया गया है। अग्निपुराण के अनुसार दीपदान से बढ़कर न कोई व्रत है, न था और न तो होगा। दीपदान से धन और पुत्रादि की प्राप्ति होती है। दीपदान करने वाला सौभाग्ययुक्त होकर स्वर्गलोक में देवताओं द्वारा पूजित होता है। धनतेरस के दिन आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि, धनाध्यक्ष कुबेर व धन वैभव की देवी लक्ष्मी की पूजा अर्चना की जाती है। इसी दिन सायंकाल को अपने पूजा घर में अखंड दीपक जलाते हैं जो दीपावली तक जलता है अखण्ड ज्योति जलाने से निर्धनता दूर होती है तथा मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। धनतेरस से दीपावली तक तीन दिन यम के निमित्त दीपदान करने वाला अकाल मृत्यु के भय से मुक्त हो जाता है। कर्मकांड के विद्वान पंडित देवी प्रसाद मिश्र के अनुसार चतुर्दशी को हनुमान जी की पूजा अर्चना करने से रोग, शोक व क्लेश दूर होता है। अमावस्या को लक्ष्मी पूजन से धन, ऐश्वर्य एवं वैभव की प्राप्ति होती है। इसी तरह अन्नकूट पूजा के विषय में मान्यता है कि, गोवर्धन पूजा में श्रीकृष्ण को अन्नकूट का भोग लगाने से घर पर कभी अन्न की कमी नहीं होती। इसी प्रकार भैया दूज के दिन अगर भाई यमुना नदी में स्नान करते हैं, तो उन्हें यमराज के प्रकोप से मुक्ति भी मिलती है। वहीं पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन भाई यमराज ने अपनी बहन यमुना को वरदान दिया था, जिसके बाद से कार्तिक शुक्ल द्वितीया को भाई दूज मनाया जाने लगा।
आज पर्व के विशेष मुहूर्त
- बर्तन आभूषण क्रय के मुहूर्त-11ः 48 बजे से आरंभ (वृष लग्न 5:31 से 7:27 बजे तक)
- धनवंतरि पूजन सायं 6:11 बजे के बाद।
- अखंड दीप प्रज्ज्वलित करना और यम दीपदान सायं 6:11 से 7:27 बजे तक
- कुबेर पूजन सायं 6:11 बजे के बाद