महकमे के ढुलमुल रवैए के चलते यह काम लक्ष्य का आधा भी नहीं हो पाया है
संवाद न्यूज एजेंसी
सुहवल। ताड़ीघाट-दिलदारनगर ब्रांच लाइन पर पीक्यूआरएस (प्लासर क्विक रिलेयिंग सिस्टम) से पुराने स्लीपरों एवं ट्रैक को उखाड़ने का काम काफी धीमी गति से चल रहा है। अभी तक 16 दिनों में मात्र एक किमी तक ही यह कार्य हो सका है। जिस गति से यह काम चल रहा है ऐसे में शेष 29 दिन में यह कार्य पूरा कर पाना मुमकिन नहीं दिखाई दे रहा है।
मालूम हो कि इस मशीन की एक दिन में 260 मीटर तक पुरानी पटरियों एवं स्लीपरों को हटाकर उनकी जगह नया लगाने की क्षमता है। उस हिसाब से अब तक 4160 मीटर तक यह काम हो जाना चाहिए था लेकिन महकमे के ढुलमुल रवैए के चलते यह काम लक्ष्य का आधा भी नहीं हो पाया है। कार्य विगत नौ मार्च से शुरू है।
विभाग द्वारा इस रूट पर अब 52 किलो रेल की जगह 60 किलो की नई रेल जो 260 मीटर लंबी लेंथ की है लगाने का निर्णय लिया गया है, ताकि सुरक्षित संचालन के साथ ही ट्रेनों को रफ्तार दी जा सके। अगले महीने होने वाले सीआरएस के बाद पहले चरण की इस नई परियोजना के चालू होते ही सोनवल से सिटी तक जाने वाले नए रूट पर विभिन्न ट्रेनों का संचालन शुरू हो जाएगा।
बताया गया है कि पीक्यूआरएस सिस्टम से बिछाई गई पटरियां बहुत अधिक मजबूत होने के साथ ही इनमें मानवीय चूक और तकनीकी खामी की संभावना नहीं रहती है। इस संबंध में पीडब्लूआई दिलीप कुमार ने बताया कि पुरानी रेल एवं स्लीपरों की जगह नया लगाने का काम पीक्यूआरएस सिस्टम से चल रहा है। बताया कि अब 52 किलो रेल की जगह 60 किलो की नई रेल लगाई जाएगी।