गाजीपुर। जिले में अब एनएसवी (नान स्केल्पल वेसेक्टामी) सर्जन की तैनाती से परिवार कल्याण कार्यक्रम को गति मिल सकेगी। अभी तक नसबंदी शिविर में भागीदारी के लिए स्वास्थ्य महकमा गैर जनपदों से एनएसवी सर्जन की सेवाएं ले रहा था। लेकिन अब सर्जन के आने से जहां महकमा आत्मनिर्भर बनेगा तो वहीं विभागीय लक्ष्य को हासिल करने में पीछे भी नहीं रहेगा। बढ़ती जनसंख्या पर अंकुश लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर परिवार कल्याण योजना के तहत विभिन्न कार्यक्रम समय-समय पर संचालित किए जाते हैं। इनमें से परिवार कल्याण का नसबंदी कार्यक्रम भी है। इसके लिए प्रत्येक सप्ताह ब्लॉकवार सामुदायिक स्वास्थ्य केेंद्रों पर नसबंदी शिविर आयोजित किए जाते हैं। लेकिन एनएसवी सर्जन की तैनाती न होने से निर्धारित लक्ष्य को पूर्ण करने में मुश्किलें आती हैं। ऐसे में शासन की ओर से बनाई क्लिनिकल आउट रिच टीम का सहारा लेना पड़ता है। उनके निर्धारित किए गए कैंप में गैर जनपदों से एनएसवी सर्जन बुलाने पड़ते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। सप्ताहभर में एनएसवी सर्जन के आ जाने से परिवार कल्याण के कार्यक्रमों में तेजी आएगी और जनपद का लक्ष्य पूरा किया जा सकेगा। शासन से स्वास्थ्य विभाग को 50 पुरुष व 8669 महिला नसबंदी का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके सापेक्ष जहां बिना एनएसवी सर्जन की तैनाती के 37 पुरुष व तीन हजार 637 महिलाओं ने नसबंदी कराया है। जबकि कोरोना काल के चलते कैंप लगाने में काफी समय विभाग को इंतजार करना पड़ा। ऐसे में एक अप्रैल तक लक्ष्य को पूर्ण करना एक चुनौती से कम नहीं है। एसीएमओ नोडल परिवार कल्याण डा. केके वर्मा ने बताया कि लंबे समय से नसबंदी के लिए एनएसवी सर्जन की तैनाती नहीं होने से काफी परेशानी हो रही थी। ऐसे में सप्ताहभर में एक एनएसवी सर्जन की तैनाती हो जाएगी। ऐसे में नसबंदी कार्यक्रम को जहां गति मिलेगी। वहीं गैर जनपदों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। ऐसे में नसबंदी के आंकड़ों में बढ़ोत्तरी भी होगी।