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Ghazipur News: कहीं लगी नहीं, कुछ मलबे में दबीं जालियां नहीं रोक पा रही नालियां

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गंगा को शहर की गंदगी से बचाने के लिए नालों में जाली लगाने का काम बेमतलब साबित हो रहा है। अभी भी शहर के अधिकांश प्रमुख घाटों के पास से बहने वाले नालों की जाली गंदगी को रोक नहीं पा रहे हैं। कुछ जगहों का हाल यह है कि लोहे की जाली लगी ही नहीं तो कुछ जगहों पर जाली मिट्टी में दब चुकी है। ऐसे में 13 किमी के शहरी प्रवाह क्षेत्र से गंगा में 23 नालों से रोजाना 14 मिलियन लीटर गंदा पानी कूड़ा-कचड़ा समाहित हो रहा है।
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नगर पालिका प्रशासन का दावा है कि बरसात से पूर्व शहर के 23 घाटों पर लोहे की जाली लगाने का काम हुआ। कुछ जगहों पर बकायदे 15 से 20 लाख रुपये में निर्माण कर जाली लगाए गए। तो कुछ जगहों पर सिर्फ जाली लगाने का काम हुआ। वहीं शनिवार को शहर के गंगा घाटों की पड़ताल हुई तो पक्का घाट, रामेश्वर घाट (मशहूर घाट) पर निर्माण कार्य तो हुए लेकिन नाले में लोहे की जाली नहीं मिली।
रामेश्वर घाट के लोगों का कहना है कि यहां लोहे की जाली लगी ही नहीं। वहीं, पक्का घाट पर लोहे की जाली अब नाले के बगल में मिट्टी में अंदर तक धंसा मिला। ऐसा ही हाल शहर के प्रमुख घाटों में शुमार कलेक्टर घाट पर भी है। वहां निर्माण कराकर जाली तो लगाया गया लेकिन गंदे पानी के साथ कूड़ा-कचड़ा नाले के माध्यम से गंगा में सीधे जा रहे हैं। अवरोध के लिए लगा जाली कारगर नहीं साबित हो पा रहा। वहां साफ-सफाई और नालों के आस-पास काफी गंदगी का अंबार लगा है।
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ऐसे में नालों की गंदगी की वजह से कलेक्टर घाट, पक्का घाट और रामेश्वर घाट पर कुछ देर खड़ा भी नहीं हुआ जाता। स्थानीय लोगों का कहना है कि नपा की ओर से दिखावटी तौर पर कुछ जगहों पर पक्का निर्माण कराया गया, कहीं लोहे की जाली लगी तो कहीं नहीं लगी।
रामगनीना निषाद, कैलाश निषाद समेत अन्य लोगों का कहना है कि नालों पर जाली लगाने और सफाई का काम किसी घाट पर ठीक ढ़ंग से नहीं हुआ। इससे कई तरह की बिमारियों और गंदगी से रोजाना लोगों को झेलना पड़ रहा है।
23 घाटों पर बरसात से पूर्व लोहे की जाली लगाई गई थी। कुछ घाटों पर पक्का निर्माण कराकर जाली लगाई गई। अभी कुछ जगहों पर पक्का निर्माण बाकी है। जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।
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लालचंद्र सरोज, ईओ नगर पालिका
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