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अब पराली जलाए, तो जाएंगे जेल

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गाजीपुर। सरकार ने एनजीटी की धाराओं के अंतर्गत खेत में फसलों के अवशेष जलाने को अब दण्डनीय अपराध मान लिया है। साथ ही इस तरह की घटनाओं पर रोकथाम की जिम्मेदारी ग्राम प्रधानों को भी सौंप दी गई है। बीते दस अक्तूबर को डीएम के दफ्तर से सभी ग्राम प्रधानों को भेजे गए पत्र के माध्यम से उन्हे निर्देशित किया गया है कि वह अपने-अपने गांवों में 15 से 20 अक्तूबर के बीच एक बैठक आहूत कर अपने ग्रामवासियों को इसकी सूचना दें। ग्रामीणों को इससे अवगत करा दें कि इस तरह की घटना के संज्ञान में आने पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति के नाम पर दोषी व्यक्ति को 2500 से 15000 रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ेगा। जबकि घटना की पुनरावृत्ति करने पर उसे जेल जाने के लिए भी तैयार रहना होगा। पत्र में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि ग्राम पंचायत के किसी व्यक्ति द्वारा पराली अथवा फसलों के अवशेषों को जलाने की घटना को अंजाम दिया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ ग्राम प्रधान अपने राजस्व लेखपाल को लिखित सूचना देंगे। इसके बाद लेखपाल दोषी व्यक्ति के खिलाफ थाने में मुकदमा पंजीकृत कराएंगे। ग्राम प्रधान द्वारा घटना को छिपाने की कोशिश किए जाने पर उन्हें भी अपराध में सह अभियुक्त मानकर उनके खिलाफ दण्डात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रधानों को इस बात के भी निर्देश दिए गए हैं कि इस तरह की सूचना को वे अपने गांव की दीवारों पर पेंट कराएं। ताकि हर ग्रामीण को इसका पता चल सके। दूसरी ओर फसल कटाई में काम आने वाले हर कंबाईन हार्वेस्टर स्वामियों को पत्र जारी कर उन्हें व्यक्तिगत रूप सूचित किया गया है कि खेतों में फसलों की कटाई से पहले वे अपने हार्वेस्टर मशीनों में सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम लगवा लें। साथ ही अपने तहसील कार्यालयों से इस का अनापत्ति प्रमाण पत्र हासिल कर लें। उन्होंने अपने हार्वेस्टर में अपेक्षित एटेचमेंट लगवा लिया है। यदि बिना सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम के कोई कंबाईन हार्वेस्टर फसलों की कटाई करते हुए पाया गया, तो हार्वेस्टर को सीज करने की कार्यवाई करते हुए उसके स्वामी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।
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