गाजीपुर। कर्बला की जंग में अपने 72 साथियों के साथ शहीद हुए इमाम हुसैन और शहीदानें कर्बला की याद में मनाया जाने वाला चेहल्लुम बृहस्पतिवार को सादगी के बीच हुआ। न तो मजलिस हुई और न ही ताजिया उठाया गया। शहर के शिया समुदाय में सोशल डिस्टेंसिंग के बीच मातम कर शहीदाने कर्बला को खिराजे अकीदत पेश की गई। शहादत को याद कर अजादार रोते रहे। बहरियाबाद : क्षेत्र में चेहल्लुम सादगी से मनाया गया। इस दौरान घरों में शहीदाने कर्बला की याद में मातम किया गया और उनके नाम पर नियाज कराई गई। कर्बला में पैगंबरे इस्लाम हजरत मुहम्मद के नवासे इमाम हुसैन मुहर्रम की 10वीं तारीख को अपने परिवार और 72 साथियों संग इस्लाम को बचाने के लिए शहीद हो गए थे। जंग में शहादत के 40 दिन पूरे होने पर शिया समुदाय में चेहल्लुम पर घर में ही मातम किया गया। कहीं-कहीं सोशल डिस्टेंसिंग के बीच मजलिस भी हुई। जिसम्रें उलेमा ने कर्बला की शहादत का बयान किया तो सुनने वाले अपने आंसू नहीं रोक सके। इस दौरान नौहा और मातम भी किया गया। जबकि रह-रह या हुसैन की सदाएं और नारा-ए-हैदरी भी गूंजता रहा। उधर, शिया के साथ ही सुन्नी समुदाय में भी चेहल्लुम पर घर-घर नियाज फातिहा कराई गई।