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Ghazipur News: चार वर्ष बाद भी नहीं लग सकी एमआरआई मशीन

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महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज से गोराबाजार स्थित 200 बेड के पुरुष अस्पताल को संबंद्ध हुए चार वर्ष बीत गए, लेकिन अब तक एमआरआई मशीन स्थापित नहीं हो सकी। प्रतिदिन 10 से 20 मरीजों को जांच की आवश्यकता होती है।
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उन्हें महंगे दामों पर निजी केंद्रों और गैर जनपदों की शरण लेनी पड़ती है। हालांकि मेडिकल कॉलेज प्रशासन वर्ष के अंत तक मशीन स्थापित कराने का दावा कर रहा है। लंबे समय तक बेहतर चिकित्सकीय सुविधाओं से वंचित शहर व ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को मेडिकल कॉलेज स्थापित होने के बाद राहत मिलनी शुरू हो गई।
धीरे- धीरे मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से जहां चिकित्सकों की संख्या बढ़ाई गई, वहीं अत्याधुनिक जांच की सुविधाओं से सृदृढ़ भी किया गया। सिटी स्कैन और डायलिसिस की सुविधा होने के बाद एमआरआई की सुविधा से लैस करने का दावा बीते वर्ष किया गया, लेकिन पूरा नहीं हो सका।
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गंभीर बीमारियों की जांच के लिए होती है एमआरआई
मस्तिष्क, रीढ़, जोड़ों, हृदय, लीवर, और कई अन्य अंगों की एमआरआई चित्रों के द्वारा ज्यादा सही आता है। खासकर कैंसर, हृदय की बीमारी, मांसपेशियों और हड्डियों की बीमारियों, और कई अन्य बीमारियों का डायग्नोसिस एमआरआई स्कैन से किया जा सकता है। ऐसे में मरीज की बीमारी अन्य जांच द्वारा पकड़ में न आने पर एमआरआई कराने की सलाह चिकित्सकों द्वारा दी जाती है।
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