संवाद न्यूज एजेंसी
बारा। भदौरा ब्लाक के बारा, गोड़सरा, उसिया आदि गांवों में कई बच्चों के खसरा (मीजल्स) की चपेट में आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी किया है। बारा में खसरे की चपेट में आकर एक बच्चे की मौत होने और आधा दर्जन बच्चों में खसरा की पुष्टि के बाद अब स्वास्थ्य विभाग उन गांवों में सघन सर्वे कराएगा। स्वास्थ्य विभाग और डब्लूएचओ की टीम ने जागरूकता अभियान भी शुरू कर दिया है।
भदौरा ब्लाक के बारा, गोड़सरा, गदाईपुर, उसिया आदि गांवों में बीते कई दिनों से बच्चे खसरे की चपेट में हैं। संक्रमित बच्चों की उम्र छह माह से लेकर नौ वर्ष के बीच है। इन बच्चों को खसरे का टीका नहीं लगा है। हालांकि खसरे की चपेट में आए सभी बच्चों की हालत नियंत्रित है। शुक्रवार को डिप्टी सीएमओ डॉक्टर एसके मिश्रा, डब्लूएचओ के एसएमओ डॉक्टर विनय शंकर तिवारी, मानिटर अमित, पीएचसी प्रभारी बारा डॉक्टर अजीत आदि ने बारा गांव में खसरे की चपेट में आए बच्चों को विटामिन ए की खुराक पिलाने के साथ ही उनका स्वैब और ब्लड लेकर जांच के लिए लखनऊ भेजा।
डिप्टी सीएमओ डॉक्टर एसके मिश्रा ने बताया कि सभी बच्चों की स्थिति ठीक है। स्वास्थ्य विभाग ने गांवों में सर्वे शुरू कर दिया है। लोगों से अपील की गई है कि वे अपने बच्चों का टीकाकरण जरूर करवाएं। सीएचसी भदौरा के अधीक्षक डॉक्टर धनंजय आनंद ने बताया कि 16 एएनएम के साथ 239 आशा को गांवों में सर्वे के लिए लगाया गया है।
सर्वे के दौरान उसिया गांव में शून्य से नौ माह तक के 337 बच्चे व नौ माह से पांच साल तक के 1347 बच्चों को विटामिन ए की खुराक पिलाने के साथ ही उनको एमआर का टीका लगाया जाएगा। वहीं अन्य गांवों में सर्वे जारी है।
000
खसरे के दो टीके जरूरी
बारा। डिप्टी सीएमओ एसके मिश्रा ने बताया कि खसरे के दो टीके लगते हैं। ये टीके नौ माह और 16 माह की उम्र में लगाए जाते हैं। खसरे के लक्षणों में शरीर में बगैर पानी के लाल दाने आना और आंखों का लाल होना शामिल है। संक्रमित बच्चों को विटामिन ए की खुराक दी जाती है। यह बीमारी गंभीर है। सजगता जरूरी है। लापरवाही से बच्चे की जान भी जा सकती है। देशभर में खसरा उन्मूलन कार्यक्रम चल रहा है। इसी के तहत जिन बच्चों के इस बीमारी की चपेट में आने की आशंका होती है, उनकी जांच की जाती है।