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साहित्य की निर्मम चालाक और तिकड़मी दुनिया से दूर विनम्र लेखिका हैं मन्नू भंडारी

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राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में मंगलवार को हिंदी साहित्य की वरिष्ठ लेखिका मन्नू भंडारी को श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए डा. संगीता मौर्य ने कहा कि हिंदी साहित्य में चमकदार और हाई प्रोफाइल लेखक तो बहुत हुए हैं लेकिन ऐसे लेखक बहुत कम हुए हैं जो मंच पर नहीं नेपथ्य में रहना पसंद करते हैं। मन्नू जी इसी परंपरा की एक जेनुइन लेखिका थीं। साहित्य की निर्मम चालाक तथा तिकड़मी दुनिया से दूर वह विनम्र, ईमानदार और पारदर्शी लेखिका हैं। इस अवसर पर डा. निरंजन कुमार यादव ने कहा कि हिंदी पढ़ने-लिखने वाला ऐसा शायद ही कोई मनुष्य होगा, जिसने मन्नू भंडारी का कुछ न कुछ न पढ़ा हो। स्त्री चेतना को उनसे बेहतर किसी ने नहीं जिया, न उनसे सूक्ष्मतर ढंग से किसी ने लिखा। आपका बंटी और महाभोज उपन्यास हिंदी साहित्य के बेहतरीन उपन्यास हैं। श्वेता यादव ने कहा कि वह केवल भारतीय निम्न मध्यवर्ग की प्रतिनिधि कथाकार ही नहीं थीं बल्कि भारतीय राजनीति की पतन गाथा की भी पहली कथाकार हैं। पूजा कुशवाहा ने कहा कि वह अपने स्वभाव से भले ही विनम्र और सरल थीं लेकिन भीतर से वह बहुत स्वाभिमानी तथा सिद्धांतवादी थीं। इसलिए उनके जीवन में किसी तरह का कोई विचलन नहीं दिखाई देता और न कोई पाखंड या अंतर्विरोध। मीडिया प्रभारी डॉ. शिव कुमार ने कहा कि उन्होंने कस्बों और छोटे शहरों की स्त्रियों का दुख दर्द करीब से जिया और भोगा था। कार्यक्रम का संचालन ज्योति वर्मा ने किया। इस अवसर पर शैलजा दूबे, पूजा यादव, नीतू, अनुराधा, सिद्धि सिंह, रीना, अरुणिमा, अंजू, अर्चना आदि उपस्थिति थीं।
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