संवाद न्यूज एजेंसी
रेवतीपुर। कुपोषण को समाप्त करने के लिए सरकार करोड़ो रुपये खर्च कर रही है, बावजूद कुपोषण खत्म नहीं हो रहा है। वजह स्थानीय स्तर पर कर्मचारियों द्वारा ऐसे मामलों में अनदेखी की जा रही है। सोमवार को ऐसे ही एक मामले में एनआरसी में भर्ती करने के बजाए दो बच्चों का वापस लौटा दिया गया।
स्थानीय ब्लाॅक के एक आंगनबाड़ी केंद्र से दो कुपोषित रेवतीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, जिनमें से एक अतिकुपोषित और एक कुपोषित था। इनका वजन मानक के अनुरूप नहीं मिला। इसके बाद सीडीपीओ और स्वास्थ्य अधिकारी ने जांच के बाद दोनों को एनआरसी (पोषण पुनर्वास केंद्र) भर्ती कराने के लिए लाए। जहां उसका उपचार शुरू करना तो दूर की बात दोनों कुपोषित बच्चों को भर्ती भी नहीं किया गया और उन्हें बैरंग लौटा दिया गया।
इसके बाद परिजन और बाल विकास विभाग के कर्मचारी ने इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को देने के बाद लौट गए। परिजनों पोषण पुनर्वास केंद्र के कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए जांच कर दोषी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। लोगों ने कहा कि अगर यही हाल रहा तो कुपोषण से जंग कैसे जीती जा सकती है।
महकमेे के अनुसार पूरे ब्लाॅक में 203 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जहां 16572 नौनिहाल पंजीकृत है। इनमें से शून्य से छह माह तक 636, शून्य से तीन वर्ष तक 8392 जबकि तीन से छह वर्ष तक 7544 नौनिहाल पंजीकृत है। इनमें से 84 कुपोषित एवं 46 अतिकुपोषित नौनिहाल है। सीडीपीओ अखिलेश कुमार ने बताया कि ब्लाक क्षेत्र से दो कुपोषित बच्चों को एनआरसी भेजा गया था, लेकिन वहां बच्चों की हालत गंभीर देख लौटा दिया गया। इसकी सूचना संबंधित उच्चाधिकारियों को दी गई है।