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आंवले के पेड़ के नीचे बनाकर खाया, पाया अक्षय लाभ

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अक्षय नवमी शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में पूरे उत्साह के साथ मनाई गई। लोगों ने आंवले के वृक्ष की पूजा की और भंडारे का आयोजन हुआ। मुहम्मदाबाद संवाददाता के अनुसार अक्षय नवमी पर बुधवार को आंवला के वृक्ष की पूजा की और आंवले और भतुआ का दान किया। पेड़ की परिक्रमा कर हवन पूजन हुआ। पूजा के बाद महिलाओं ने ब्राह्मण को भोजन कराने के बाद सपरिवार प्रसाद ग्रहण कर अक्षय लाभ प्राप्त किया।
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अक्षय नवमी को आंवला नवमी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने कुष्मांडा नामक दैत्य का वध किया था। सतयुग का आरंभ भी उसी दिन से ही माना जाता है। महिलाओं ने आंवले के पेड़ के नीचे खाना बनाकर ब्राह्मण को भोजन कराने के बाद सपरिवार पेड़ के नीचे भोजन किया।
सैदपुर के बूढ़े नाथ महादेव और औड़िहार के वराहधाम स्थित आंवले के वृक्षों करीब श्रद्धालुओं का जमावड़ा हुआ। वराह धाम के बाबा हरि ओम महाराज ने बताया कि आंवला वृक्ष के मूल में भगवान विष्णु, ऊपर ब्रह्मा, स्कंध में रुद्र, शाखाओं में मुनिगण, पत्तों में वसु, फूलों में मरुद्गगण, और फलों में प्रजापति का वास होता है। ऐसे में आंवला नवमी के दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। साथ ही इसकी पूजा करने वाले व्यक्ति के जीवन में धन, विवाह, संतान, दांपत्य जीवन से संबंधित समस्या भी खत्म हो जाती है। मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए भी अक्षय नवमी का दिन सबसे उत्तम माना गया है।
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