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Ghazipur News: फरवरी में स्थापित हो जाएगा लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन टैंक

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अब कोरोना जैसी महामारी में सांसों की डोर नहीं टूटेगी। फरवरी माह के अंतिम सप्ताह तक लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन टैंक स्थापित हो जाएगा। इस पूरी परियोजना पर करीब 60 लाख रुपये खर्च होंगे। सीएमओ कार्यालय परिसर में स्थापित ट्रामा सेंटर के सामने खाली पड़ी भूमि पर टैंक स्थापित कराने के लिए जल्द ही फाउंडेशन बनाया जाएगा। एक लीटर लिक्विड ऑक्सीजन से 870 लीटर गैसीय ऑक्सीजन तैयार होंगे , जिससे काफी सुविधा होगी।
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कोरोना की दूसरी लहर में ऑक्सीजन सिलेंडर की ऐसी आफत आई की आंखों के सामने लोगों ने अपनों की सांसें टूटती देखी, लेकिन कुछ नहीं कर पाए। हालांकि संक्रमण का प्रभाव कम होने के बाद अस्पतालों को ऑक्सीजन प्लांट में स्थापित कराया गया, जिससे राहत मिल सकी। इसके बाद शासन ने लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन टैंक स्थापित कराने का निर्देश दिया, जिससे ऑक्सीजन की किल्लत को दूर किया जा सके।
इसी क्रम में ट्रामा सेंटर के सामने खाली पड़ी भूमि में जहां टैंक स्थापित कराने के लिए फाउंडेशन एवं कक्ष का जल्द निर्माण कराया जाएगा, वहीं लिक्विड ऑक्सीजन को गैसीय ऑक्सीजन में परिवर्तित करने के लिए यंत्र भी लगाए जाएंगे। इसके बाद आवश्यकता के मुताबिक सप्लाई होगी।
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फरवरी के अंतिम सप्ताह तक टैंक स्थापित हो जाएगा। बजट का 50 प्रतिशत भुगतान किया जा चुका है। लिक्विड ऑक्सीजन के एक लीटर से 870 लीटर गैसीय ऑक्सीजन मिलेगा। निर्धारित समय में इसे पूर्ण कराने को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई है। - प्रोफेसर डा. आनंद मिश्रा, प्राचार्य महर्षि विश्वामित्र स्वशासी मेडिकल कालेज गाजीपुर।
कॉपर पाइप लाइन से होगी सप्लाई
टैंक से लिक्विड ऑक्सीजन पाइप के सहारे वहां लगे संयंत्रों में पहुंचेगी, जहां से वह गैसीय ऑक्सीजन के रूप में परिवर्तित होगा। इसके बाद कॉपर पाइप लाइन से गैसीय ऑक्सीजन की सप्लाई जिला और महिला अस्पतालों को होगी, जिससे मरीजों को ऑक्सीजन की किल्लत का सामना न करना पड़े।
गुजरात से आएगा टैंक, आधी धनराशि का हुआ भुगतान
गाजीपुर। लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन टैंक गुजरात से आएगा। इसमें 20 हजार लीटर लिक्विड ऑक्सीजन मौजूद होगा। इसके समाप्त होने पर रिफलिंग का कार्य भी गुजरात की कार्यदायी संस्था द्वारा की जाएगी। मेडिकल कालेज प्रशासन की ओर से इसके लिए बजट का 50 प्रतिशत भुगतान किया जा चुका है।
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