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हत्या के मामले में पिता-पुत्र सहित चार को उम्र कैद

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गाजीपुर। सत्र न्यायालय ने हत्या के मामले में पिता पुत्र सहित चार लोगों को उम्र कैद की सजा सुनाई। साथ ही मुकदमे के विवेचक तत्कालीन थानाध्यक्ष के विरुद्ध विवेचना में लापरवाही बरतने पर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।
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अभियोजन के अनुसार थाना भांवरकोल के गांव शेरपुर खुर्द निवासी माधुरी राय ने 30 दिसंबर 2015 को तहरीर दी कि सुबह सवा 10 बजे उसके पति अशोक राय उर्फ लल्लन गांव के पट्टीदारों के साथ दरवाजे पर बैठे थे। तभी गांव के संजय राय व उसका पुत्र दामोदर राय उर्फ बड़क राय, भाई दिगंबर राय उर्फ लालू और उत्कर्ष राय हथियार लेकर आए और अपशब्द कहते हुए अशोक राय पर फायर कर दिया। वह पति को लेकर सदर अस्पताल गई जहां से बीएचयू के लिए रेफर कर दिया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने केस दर्ज किया थानाध्यक्ष ने विवेचना शुरू की। इसमें तीन आरोपियों दामोदर राय, दिगंबर राय और संजय राय के विरुद्ध अदालत में आरोप पत्र प्रेषित किया गया। विचारण में गवाहों के बयान और वादिनी के दरखास्त पर कोर्ट ने आरोपी उत्कर्ष राय को बतौर मुलजिम तलब किया।
दोनों पक्ष की बहस सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय संजय कुमार यादव की अदालत ने बृहस्पतिवार को चारों आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनाई। साथ ही सभी पर 75-75 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। इसमें से 60 प्रतिशत की धनराशि वादिनी माधुरी राय को देने का आदेश दिया है। इसके अलावा विवेचक विपिन सिंह के विरुद्ध विवेचना में लापरवाही बरतने पर मुकदमा दर्ज करने का निर्देश देते हुए आदेश तत्काल पुलिस अधीक्षक, जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस महानिदेशक लखनऊ को पत्र प्रेषित करने का आदेश दिया है।
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एक और मामले में 18 वर्ष बाद पिता-पुत्र को आजीवन कारावास
मामूली बात पर हुई थी वारदात, एक किशोर भी था आरोपी
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। विशेष न्यायाधीश एससी एसटी एक्ट चंद्रप्रकाश तिवारी की अदालत ने बृहस्पतिवार को 18 वर्ष पूर्व हुई हत्या के मामले में पिता और पुत्र को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
अभियोजन के अनुसार दुल्लहपुर थाना के अमेहता गोदसैया गांव के मृत्युंजय राम ने तहरीर दी थी कि 26 फरवरी 2004 को गांव में बच्चों के विवाद से नाराज होकर एक किशोर आरोपी, हरिकेश यादव, रामाशीष यादव एवं उसके पिता गोविंद यादव गाली देने लगे और वादी के भाई अजय कुमार पर फायर कर दिया, जिससे उनकी मौत हो गई।
पुलिस ने विवेचना के बाद आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र पेश किया। विचारण के दौरान हरिकेश यादव की मौत हो गई। न्यायालय ने एक को किशोर अपचारी मानते हुए उसकी पत्रावली किशोर न्यायालय को भेज दी। बाकी आरोपियों पर कार्रवाई शुरू हुई। न्यायालय में पेश होकर सात गवाहों ने बयान दर्ज कराया। अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष की बहस सुनने के बाद न्यायालय ने रामाशीष यादव एवं उसके पिता गोविंद यादव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 25-25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
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