दुल्लहपुर। भगवान भाव से प्रकट होते हैं। आत्मा रूपी परमात्मा की प्राप्ति के लिए हम सभी भगवान का अनुसरण कर रहे हैं। अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर किया गया कार्य का कभी क्षय नहीं होता। ये बातें सिद्ध पीठ हथियाराम के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर महंत भवानी नंदन यति महाराज ने क्षेत्र के मंझनपुर कला गांव में गुरु दीक्षा महोत्सव के कार्यक्रम में कही।
उन्होंने बताया कि गुरु दीक्षा वह मंत्र और तौर तरीके हैं, जो गुरु के जरिए शिष्य में बोलने, सोचने की इच्छाओं का विकास कराता है। आज बड़े ही सौभाग्य से यह सब हो रहा है। यहां पर शैव संन्यासी परंपरा के तहत गुरु दीक्षा जा रही है। उन्होंने कहा भगवान शिव का पंचाक्षर का नाम सर्वश्रेष्ठ है। बताया नम: शिवाय ऐसा मंत्र है जो वेदों पुराणों में भी मिलता है। शैव परंपरा से गुरु दीक्षा आठ प्रकार से दी जाती है। कहा जैसे माचिस व तीली की रगड़ से अग्नि, माता-पिता के सहयोग से पुत्र की प्राप्ति होती है। कर्म करने पर क्रिया-प्रतिक्रिया होती है। गुरु के मिलन से ज्ञान मिलता है। पत्थर से पत्थर, लकड़ी से लकड़ी रगड़ने से आग पैदा होती है उसी प्रकार गुरु-शिष्य मिलन से ज्ञान प्राप्त होता है।
कहा कि कानपुर के प्रांत प्रचारक श्रीराम के दीक्षा कार्यक्रम में उनका संपूर्ण कुल बंधुओं को दीक्षा करने के लिए काशी के 55 वैदिक विद्वानों के संग में कार्य करने का अवसर मिला है। यह सिद्धपीठ 900 वर्षों के क्रम में 26वें पीढ़ी से गुरुजनों द्वारा की जा रही है। यहां से सिद्धदात्री मां में मातृत्व भाव है। उन्होंने कहा कि अध्यात्म में आने के लिए आदि शंकराचार्य को भी घर छोड़ना पड़ा। अब तो मुसलमान लोग भी रामायण पढ़ रहे हैं, जो हिंदू रामायण फाड़ रहे हैं, उनसे बेहतर वह मुसलमान है जो रामायण पढ़ते हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने लंका पर विजय पताका फहराया तो विभिषण को लंका का राजा बना दिया। भगवान राम से लक्ष्मण ने कहा 14 वर्ष जंगल जंगल घूम कर आज सोने की लंका पाई वह भी बिना अन्न चावल के समुद्र के खारे पानी से सोने की लंका को सौंप दी, तो राम ने मुस्कुराते हुए कहा कि सोने की लंका से इतना मोह हो गया है। इस सोने की लंका की चकाचौंध में मत पड़ो। मां घर पर आने के लिए हम भाइयों का इंतजार कर रही हैं। हमारे लिए सोने की लंका मिट्टी के ढेले के समान है। कहा कि मेरी जन्मभूमि अयोध्या है। ठंडक देने का कार्य वहीं घड़ा कर सकता है जो अग्नि में तपा हो। इस मौके पर कानपुर के प्रांत प्रचारक श्रीराम ने कहा कि आज का कार्यक्रम क्षेत्र की दशा व दिशा बदलेगी, धार्मिक मंच पर जनपद की तमाम विभूतियां आई हैं। बिना गुरु के किसी का विकास नहीं है। सभी लोग अपने जीवन में गुरु बनाएं तभी अंधकार से प्रकाश की गति को आगे बढ़ा पाएंगे। सिद्ध पीठ हथियाराम सामान्य पीठ नहीं है। मां भगवती की मिट्टी को माथे पर लगा कर देखें तो कैसा मिलता है। मां की गोद में सुख शांति मिलती है। हम क्षेत्रवासी बहुत ही सौभाग्यशाली हैं जो हथियाराम मठ की गोद में हैं। कहा कि ब्रह्मा जी ने भी मां सरस्वती, दुर्गा, लक्ष्मी को प्रथम स्थान दिया है। जैसे राम के सीता, लक्ष्मण के साथ उर्मिला की चर्चा होती है। कार्यक्रम में एमएलसी विशाल सिंह चंचल, भाजपा के जिलाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह, पूर्व सांसद राधामोहन सिंह, आचार्य पंडित सुरेश चंद्र पांडे, संतोष यादव, दयाशंकर सिंह, राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के दुर्गा प्रसाद, देवरहा बाबा, आनंद मिश्रा संतोष मिश्रा आदि मौजूद रहे। आयोजक श्रीराम सिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया।