फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

खरीफ तो गई अब रबी की चिंता में किसान

विज्ञापन
विज्ञापन
बाढ़ प्रभावित इलाकों के गांवों में अब जलभराव बड़ी मुसीबत के रूप में किसानों के सामने खड़ा है। मानिकपुर, मैनपुर, तुलापट्टी, सरैंया, लखनचंदपुर, करंडा, बसंतपट्टी, प्रतापपुर, मेदनीपुर, उधरनपुर, कुचौरा, रामनाथपुर और गोशंदेपुर के लगभग पांच सौ किसानों की 1500 बीघा भूमि झील बन गई है। करीब 75 प्रतिशत किसान ऐसे हैं जिनका पूरा परिवार खेती पर ही आश्रित है। एक तरफ तो किसानों की फसल नष्ट हो गई और दूसरी तरफ रबी की फसलों की भी बुआई नहीं होने की चिंता सताने लगी है।
विज्ञापन

मानिकपुर निवासी किसान अजय सिंह ने बताया कि अगर जल्द खेतों से पानी नहीं निकला तो नवंबर और मई-जून में होने वाली बेटियों की शादी टाल देंगे। वजह कृषि पर आधारित किसान बाराती अतिथियों का सत्कार भी नहीं कर पाएंगे और न ही शादी के लिए खरीदारी ही कर सकेंगे। बाढ़ आने के बाद वर्षों से इन खेतों में जलभराव हो जाता था।
लेकिन नालियों से पानी पुन: गंगा में लौट जाता था जिसे कुछ लोगों ने पाट दिया है। ऐेसे में जलभराव की समस्या पैदा होने लगी। पिछले पांच वर्षों से स्वाभिमान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अमितेश मिश्रा और कुछ समाजसेवी मिलकर दो तीन गांवों के कुछ किसानों के सहयोग से पैसा एकत्र कर जलनिकासी की व्यवस्था करते रहे हैं। अमितेश मिश्रा ने कहा कि बारिश कम होने से खरीफ की भी बुआई नहीं हुई है, अब बाढ़ से प्रभावित खेतों से परेशानी बढ़ गई है। किसान बदहाली में जीने को विवश हैं।
विज्ञापन

कुचौरा के विद्या प्रकाश दूबे, धीरेंद्र सिंह, मनोज सिंह, राजेश सिंह, उधरनपुर के बृजराज सिंह, राकेश सिंह, रामनाथपुर के दीपक कुमार, रमेश सिंह दिनेश सिंह तुलापट्टी के सपन दूबे, आनंद दूबे आदि प्रभावित किसानों ने कहा कि जलनिकासी की व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए। लेकिन इस पर जिले के आला अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं देते और किसानों को उनके हाल पर ही छोड़ देते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें