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दासी मंथरा के कहने पर कोपभवन में गईं कैकेयी

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अतिप्राचीन रामलीला कमेटी हरिशंकरी की रामलीला के चौथे दिन वंदे वाणी विनयको आर्दश रामलीला मंडल के द्वारा हरिशंकरी स्थित श्रीराम चबुतरा पर लीला के दौरान राज तिलक की तैयारी, मंथरा, कैकेयी संवाद, कोपभवन लीला का मंचन किया गया।
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राजा दशरथ श्रीराम के विवाह के बाद अयोध्या आते हैं। राम को राजपाट सौंपकर खुद वन जाने का विचार कर राजा दशरथ अपने कुल गुरु वशिष्ठ को बुलाकर बात करते हैं। गुरु महाराज के विचार से सहमत होते हैं और दशरथ मंत्री सुमंत को राज तिलक की तैयारी करने का आदेश देते हैं। अयोध्या नगरी को भव्य रूप से सजाया जाता है। ये देखकर दासी मंथरा महारानी कैकेयी के पास आकर उनके कान भरती है।
तब मंथरा कैकेयी को राजा दशरथ से वचन मांगने की याद दिलाती है। हुए के लिए कहती है तैयार करती है। दासी के बात को सुनकर महारानी कैकेयी कोपभवन में चली जाती है।
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