इस मौके पर संयोजक अरुण कुमार सिंह ने जंगीपुर की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इस मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की।
उन्होंने कहा कि एक मंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन आंदोलन समाप्त कराने के लिए जंगीपुर अनशन स्थल पर पहुंचा था। अनशनकारी मान भी गए थे। बावजूद इसके अनशनकारियों सहित उनके समर्थकों पर पुलिस ने लाठियां बरसाई। कहा कि इस मामले में पुलिस ने कुछ ऐसे लोगों को भी जेल में डाल दिया, जो अपनी रिश्तेदारी में आए थे। इसके अलावा कई निर्दोष व्यापारियों को भी सलाखों के पीछे डाल दिया गया, जो सरासर गलत है। मुख्यमंत्री से जंगीपुर कांड की न्यायिक जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि किसी भी आंदोलन को दमन के बल पर दबाया नहीं जा सकता है। उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष अबू फखर खां ने कहा कि व्यापारियों के साथ हुई जुल्म की जांच कराई जाए। व्यापारी कभी भी उपद्रवी नहीं हो सकता। महामंत्री द्वय श्रीप्रकाश एवं अनीश अहमद ने कहा कि पुलिस ने निर्दोषों पर लाठियां बरसाकर तानाशाही का परिचय दिया है। घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी जंगीपुर में शांति का माहौल कायम नहीं हो सका है। अभी भी निर्दोष व्यापारियों का उत्पीड़न जारी है। व्यापारी भयाक्रांत हैं। अगर उत्पीड़न बंद नहीं हुआ तो व्यापारी धरना-प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षक संघ के नेता ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि शिक्षक नेता ओमप्रकाश सिंह निर्दोष हैं। पुलिस के इस अन्याय को शिक्षक बर्दाश्त नहीं करेगा और इसके लिए आंदोलन करेगा। युवा नेता और शिक्षक नेता से जेल में मिलने वालों में बटुकनारायण मिश्रा, अरुण कुमार सिंह, अधिवक्ता सुरेश सिंह, गौतम मिश्रा, अबू फखर खां, रामशब्द सिंह, श्यामबिहारी सिंह, उदयप्रताप सिंह, ज्ञानेंद्र सिंह, लोहा सिंह, अरविंद बिंद आदि लोग शामिल थे।