मरदह। क्षेत्र के ग्राम पंचायत तेजपुरा के प्रकरण में बृहस्पतिवार को तीन सदस्यीय जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट खंड विकास अधिकारी अनुराग राय को सौंप दिया। इसके कारण गांव की गंवई राजनीति में सरगर्मी तेज है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि अगर जांच सही तरीके से की गई है तो कई लोगों का नपना तय है। मालूम हो कि बीते निर्वाचित ग्राम पंचायत सदस्य अर्जुन कुमार, उषा देवी, शमशेर राम, जयराम राम, विद्या देवी, बिंदु देवी, रामदीन राम ने डीएम आर्यका अखौरी, मुख्य विकास अधिकारी संतोष कुमार वैश्य, डीपीआरओ अंशुल मौर्या को शिकायती पत्र सौंपा था। इसके जरिए ग्राम प्रधान रामसुधार यादव और तत्कालीन ग्राम सचिव पर गंभीर आरोप लगाया गया था। उनका कहना है कि तीन वर्ष के कार्यकाल में किसी को भी खुली बैठक में नहीं बुलाया गया तो हमारे हस्ताक्षर कैसे हो गए। कहीं न कहीं गड़बड़झाला है। आरोप है कि ग्राम प्रधान ने ग्राम पंचायत सदस्यों के बिना उपस्थिति के ही फर्जी हस्ताक्षर करवा दिए। तीन वर्षों में बिना किसी खुली बैठक बुलाए कार्य कराकर भुगतान भी करा लिया। आरोपों को गंभीरता से लेते हुए तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया गया। जांच टीम में एडीओ पंचायत कौशल किशोर सिंह, एडीओ एजी राममिलन गोंड, एडीओ कॉरपोरेटिव विद्याप्रकाश श्रीवास्तव ने खुली बैठक बुलाकर जांच किया। इस दौरान दोनों पक्षों का कलमबद्ध बयान दर्ज किया गया था। दूसरी तरफ ग्राम प्रधान अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बता रहे हैं। उनका कहना है कि सभी आरोप बेबुनियाद हैं। वहीं गांव के पंकज कांत सागर, पप्पू सिंह, अजय सिंह, भरथ सिंह, भगवान दास, मुन्ना यादव ने जिलाधिकारी एवं सीडीओ से शिकायत की थी कि गांव के सरकारी विद्यालय में मौजूद ईंट उठवाकर प्रधान निजी उपयोग में ले लिए। इस संबंध में एडीओ एजी राममिलन गोंड ने बताया कि जांच कर रिपोर्ट खंड विकास अधिकारी अनुराग राय को सौंप दिया गया है।