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Ghazipur News: पूरे विश्व को आकर्षित करती है भारतीय संस्कृ ति

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गाजीपुर। शहर के स्वामी सहजानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय एवं केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा के संयुक्त तत्वावधान में वर्तमान वैश्विक परिवेश में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की प्रासंगिकता विषयक द्वि-दिवसीय अंतर्विषयक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित है। इस अवसर पर संगोष्ठी की स्मारिका ‘अभिज्ञान-कुंभ’ का विमोचन हुआ। इसके साथ ही प्रो. गीता सिंह की पुस्तक ‘सगुण काव्य’ तथा प्रो. निर्मला एस मौर्या एवं डॉ. प्रमोद कुमार ‘अनंग’ के सह-लेखन में रचित पुस्तक ‘गर्भाधान संस्कार : एक उत्कृष्ट परंपरा’ का लोकार्पण किया गया।
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मुख्य अतिथि अध्यक्ष काव्य रंग एवं निदेशक एशियन आर्ट्स काउंसिल इंग्लैंड जया वर्मा ने वर्तमान वैश्विक परिवेश के अंतर्गत राष्ट्रवाद, मानवतावाद, आशावाद को जोड़ा। गोंगडांग विश्वविद्यालय चीन के प्रो. विवेकमणि त्रिपाठी ने विशेष वक्तव्य देते हुए कहा कि संस्कृति राष्ट्र की आत्मा है। राष्ट्रवाद की अवधारणा सांस्कृतिक सापेक्षवाद की ही है।
निदेशक यूजीसी एचआरडीसी, बीएचयू, विजिटिंग प्रोफेसर बुल्गारिया प्रो. आनंदवर्धन शर्मा ने कहा कि हमारी संस्कृति पूरे विश्व को आकर्षित करती है। केंद्रीय हिंदी संस्थान के प्रो. उमापति दीक्षित ने कहा कि राष्ट्र एक सांस्कृतिक इकाई है। जननी जन्मभूमि की अवधारणा को आत्मसात भारत ने किया। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अवधारणा को समझ कर सांस्कृतिक पुनर्निर्माण किया जा सकता है।
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विशिष्ट अतिथि प्रो. गीता सिंह ने कहा कि भारत प्राचीन सांस्कृतिक राष्ट्र है। भारतीय दर्शन संपूर्ण मानवता की भावना से भरा हुआ है। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रो. अवधेश प्रधान ने कहा कि भारत की संस्कृति को भारतीय जनता ने बचाया। उद्घाटन सत्र में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डॉ. विजय कुमार राय ने कहा कि राष्ट्रवाद जैसे गंभीर मुद्दे पर विचार-विमर्श करने के लिए यह महाविद्यालय मंच प्रदान कर रहा है।
इससे पहले छात्राओं ने महाविद्यालय के कुलगीत की मनमोहक प्रस्तुति की। डॉ. अनंग कृत जनपद गीत ने सभागार में उपस्थित दर्शक, श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। विषय प्रवर्तन महाविद्यालय के हिंदी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. राकेश पांडेय ने किया। संचालन संगोष्ठी के समन्वयक हिंदी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रमोद कुमार श्रीवास्तव एवं धन्यवाद ज्ञापन महाविद्यालय के पूर्व सचिव कवींद्रनाथ शर्मा ने किया।
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