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Ghazipur News: डॉक्टर मिले तो समझें खुद को भाग्यशाली, हो गई जांच तो क्या बात

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पड़तालः फोटो
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ग्रामीण इलाकों की स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी, उपचार को भटक रहे मरीज

कहीं एक्स-रे मशीन पर जमी धूल, तो कहीं जांच की नहीं है व्यवस्था

समय से पहुंचना तो दूर, पूरे दिन डॉक्टर नदारद, पंजिका में रहते हैं उपस्थित

संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। जिले के ग्रामीण इलाकों की स्वास्थ्य सेवाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। इन दिनों बेपटरी हो चुकी चिकित्सकीय व्यवस्थाओं के चलते उपचार के लिए मरीज इधर- उधर भटकने को विवश हैं। स्थिति तो यह है कि कहीं एक्स-रे और सीबीसी मशीन खराब और धूल फांक रही है। तो कहीं जांच की व्यवस्था ही नहीं और संबंधित कर्मियों की तैनाती कर दी गई है, जो बिना कार्य प्रतिमाह वेतन उठा रहे हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि कई सीएचसी- पीएचसी पर तैनात डॉक्टर समय से पहुंचना तो दूर, पंजिका में उपस्थिति बनाकर पूरे दिन गायब रहते हैं।
भांवरकोल: शेरपुर कला गांव स्थित न्यू पीएचसी पर तैनात डाक्टर एके सिंह और स्वास्थ्य कर्मी सत्येंद्र मिश्रा की 12. 50 बजे तक कुर्सी खाली थी। ग्रामीणों ने बताया कि यहां की स्थिति काफी खराब है। शायद ही चिकित्सक दिखाई पड़े। दुबिहा: गोडऊर गांव में करोड़ों रुपये की लागत से बना सीएचसी लोगों के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा है।
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स्थिति यह है कि गंभीर मरीजों का उपचार तो दूर तत्काल उन्हें रेफर कर दिया जाता है। विशेषज्ञ चिकित्सक तैनात नहीं है। सर्जन के अभाव में प्रसव के लिए प्राइवेट अस्पताल की शरण लेनी पड़ती है। यहां मौजूद जांच के उपकरण जर्जर और पुराने हैं, जो किसी काम के नहीं हैं। एक्स- रे मशीन बहुत दिनों से खराब पड़ी हुई है। परिसर चारागाह बना हुआ है, चाहरदीवारी नहीं होने से अराजकतत्वों का जमावड़ा लगा रहता है।
कासिमाबाद: सीएचसी पर एक महिला डॉक्टर सहित कुल चार चिकित्सकों की तैनाती है। केंद्र पर एक्स-रे मशीन संचालित करने के लिए दो टेक्नीशियनों की तैनाती है, लेकिन यहां पर 12 वर्ष बाद भी अभी तक एक्स-रे मशीन नहीं लगी। दांत के डॉक्टर नहीं है, लेकिन मरीजों को देखने के लिए चेयर और उसकी पूरी व्यवस्था लगी हुई है। एक्स-रे मशीन चलाने वाले टेक्नीशियन बैठकर वेतन ले रहे हैं।
प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. एनके सिंह ने बताया कि मरीजों के भर्ती करने का काम शुरू है। जीवन रक्षक दवाएं मौजूद है। जमानिया: बरूईन सीएचसी की स्थिति तो ऐसी है कि देखकर लगता है कि यहां लंबे समय से सीबीसी मशीन तो खराब पड़ी ही हुई है, एक्स- रे मशीन धूल फांक रही है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि यहां समय से उपस्थित होना तो डॉक्टर नदारद रहते हैं और फर्मासिस्ट मरीजों को दवा दे रहे हैं।
कई मरीज तो डॉक्टर का घंटों इंतजार के बाद घर वापस लौट गए। इस संबंध में सीएमओ डा. देश दीपक पाल ने बताया कि खराब पड़ी जांच मशीनों को बदलने के लिए पत्र शासन को भेजा गया है। लापरवाह चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।


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सुबह साढ़े नौ बजे से ओपीडी की पर्ची लेकर घूम रहा हूं। सुबह 11.30 बजे तक तक चिकित्सक का पता नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की हालत काफी खराब हैं। खासकर बरूईन सीएचसी पर तो घर बैठ कर डॉक्टर पैसा ले रहे हैं।- जवाहिर, मरीज।

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बरूईन सीएचसी पर शायद ही चिकित्सक मिले। फर्मासिस्ट द्वारा ही बिना स्वास्थ्य परीक्षण की दवा दी जाती है। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। - त्रिलोकी, मरीज।
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बुखार से पीड़ित हूं, दवा तो मिल गया है, लेकिन गर्मी और उमस के इस मौसम में गोडऊर सीएचसी पर पीने का पानी तक नहीं है।- सर्वजीत, मरीज।
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एक्स-रे की मशीन खराब होने से जांच नहीं हो पा रही है। घुटने की दर्द से परेशान हूं। डॉक्टर ने दवा दे दिया। बिना जांच के मिल रही दवा से किसी तरह काम चलाया जा रहा है। - तारा देवी
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