जनपद में बिना पंजीकरण अवैध अस्पताल का मकड़जाल फैला है, जिसमें फंसकर मरीजों की मौत हो जा रही है। वहीं आर्थिक दंश झेलना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग में मात्र 150 निजी अस्पताल ही पंजीकृत है, लेकिन इससे कई गुना अधिक अस्पताल और क्लीनिक का संचालन हो रहा है।
स्वास्थ्य विभाग अब तक 50 को नोटिस जारी करने और 20 के खिलाफ कार्रवाई का दावा कर रहा है। स्थिति तो यह है कि मामला शांत होने के कुछ दिन बाद ही संचालक बोर्ड हटाकर दूसरी जगह अस्पताल का संचालन शुरू कर देते हैं। यहीं नहीं कई निजी अस्पताल और प्राइवेट क्लीनिक तो ऐसे हैं, जिनके चिकित्सक सरकारी अस्पतालों में तैनाती हैं और वह अपने नर्सिंग होम में मरीजों का उपचार रहते हैं।
यही हाल निजी पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड केंद्रों का भी है, जहां पैथोलॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं है, लेकिन उनके केंद्रों का संचालन लंबे समय से चल रहा है। तहसील और ब्लॉक स्तर पर जो पंजीकृत अस्पताल हैं, वहां भी कम में ही डिग्री धारक चिकित्सक की उपलब्धता है।
सिर्फ रजिस्ट्रेशन के दौरान उनकी डिग्री और रजिस्ट्रेशन संख्या देकर पंजीयन करा लिया जाता है, जबकि संचालक ही बिना लाइसेंस और डिग्री के चिकित्सक बनकर मरीजों का उपचार करता है।
इस संबंध में सीएमओ डॉ. देश दीपक पाल ने बताया कि 150 निजी अस्पताल पंजीकृत हैं। करीब 50 को नोटिस जारी करने के साथ 20 के खिलाफ कार्रवाई की गई है। साथ अभियान चलाकर जांच बिना पंजीयन वाले अस्पतालों की जांच कराने के साथ कार्रवाई की जा रही है।
यह है मानक
-अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र
- प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम के तहत अनापत्ति प्रमाण पत्र।
-डॉक्टरों की योग्यता और उनका रजिस्ट्रेशन नंबर।
-पैरामेडिकल कर्मियों की तैनाती।
- चिकित्सा उपकरणों के साथ-साथ उपकरण भी।