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अब आयुष्मान लाभार्थियों को लोकल पर्चेज की सुविधा

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गाजीपुर। सरकारी अस्पताल में दवा नहीं है तो घबराने की जरूरत नहीं है। आयुष्मान कार्ड है ना। आप इस कार्ड की मदद से इलाज कराएं। अस्पताल के स्टोर में दवा नहीं होने पर अस्पताल प्रशासन आपको बाजार से खरीद कर दवा उपलब्ध कराएगा। जी हां! सरकारी अस्पतालों से आयुष्मान लाभार्थियों के मोहभंग को देखते हुए सरकार लाभार्थियों को लोकल पर्चेज की सुविधा प्रदान करने जा रही है। इससे मरीजों के आंकड़ों को बढ़ाने में मदद मिलेगी। उपचार के लिए अस्पतालों को आईडी - पासवर्ड से लैस करने की कवायद शुरू कर दी गई है। इससे डाक्टरों के उपचार की अपडेट रिपोर्ट आनलाइन आयुष्मान के पोर्टल पर अपलोड की जा सकेगी। आंकड़ों की बात करें तो जिले में एक लाख 57 हजार 750 परिवार आयुष्मान के लाभार्थी हैं, इसमें मात्र 55 लोगों ने सरकारी अस्पतालों में उपचार कराया वहीं 4376 मरीजों ने निजी अस्पतालों को प्राथमिकता दी। 2011 की जनगणना के आधार पर गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले एक लाख 57 हजार 750 परिवारों को आयुष्मान योजना में शामिल किया गया है। इन्हें पांच लाख तक के मुफ्त इलाज की सुविधा देने के लिए जिला और महिला अस्पताल के अलावा ब्लाकों के 16 सीएचसी-पीएचसी को भी योजना से जोड़ा गया। साथ ही 18 निजी अस्पतालों को भी इससे संबद्ध किया गया है। किंतु अधिकांश लाभार्थियों को सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर उपचार की सुविधा नहीं मिल सकी। वजह दवाओं की अनुपलब्धता के साथ उपचार के लिए आईडी-पासवर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया था। मरीज इलाज कराने जिला अस्पताल पहुंचते हैं तो वहां भी दवाओं का टोटा मिलता है। ऐसे में अधिकांश मरीज योजना से जुड़े 18 निजी अस्पतालों एवं गैर जिलों की तरफ रुख कर लेते हैं। सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान के लाभार्थियों के घट रहे आंकड़ों को रोकने के लिए शासन की ओर से लाभार्थियों को लोकल पर्चेज की सुविधा प्रदान करने के साथ ही सीएचसी-पीएचसी को उपचार के लिए आईडी एवं पासवर्ड से लैस करने का निर्देश दिया गया है। जो दवाएं सरकारी अस्पतालों में नहीं हैं उसे खरीद कर लाभार्थियों को दिया जाएगा। ऐसे में अब आयुष्मान लाभार्थी सरकारी अस्पतालों में बेहतर चिकित्सकीय सुविधा प्राप्त कर सकेंगे एसीएमओ नोडल आयुष्मान भारत डॉ. डीपी सिन्हा ने कहा कि अब आयुष्मान लाभार्थियों को लोकल पर्चेज की सुविधा मिलेगी। इससे सरकारी अस्पतालों में जो दवाएं उपलब्ध नहीं होगी, उसे अस्पताल प्रशासन लोकल पर्चेज के जरिए लाभार्थी मरीज को उपलब्ध करा सकेगा। साथ ही उपचार की आईडी एवं पासवर्ड से सरकारी अस्पतालों को लैस करने का कार्य शुरू कर दिया गया है।
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