इस युद्ध के हीरो रहे अब्दुल हमीद को परमवीर चक्र से नवाजा गया था। हालांकि इसी युद्ध क्षेत्र में वे 10 सितंबर, 1965 को शहीद हो गए थे। मरणोपरांत उनकी पत्नी रसूलन बीवी को तत्कालीन राष्ट्रपति ने सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से नवाजा था। इधर, अमर शहीद के बड़े बेटे जैनुल हसन आर्मी से सेवानिवृत्त होकर आए तो उनकी जयंती समारोह मनाने लगे। अब एक पुस्तक का लोकार्पण भी करा रहे हैं। किताब का नाम पापा परमवीर है। इसका लोकार्पण करने ही एक जुलाई को आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत आ रहे हैं।
शहीद वीर अब्दुल हमीद के बड़े बेटे ने कही ये बात
मां रसूलन बीवी की अंतिम इच्छा थी कि उनके निधन के बाद पिता को मिला सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र सेना के म्यूजियम में रखा जाए। मैं, उनकी अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए भतीजे जमील आलम से सम्मान मांग रहा हूं। पहले आनाकानी की। अब सम्मान देने से इन्कार कर रहे हैं। मुझे डर है कि वे इस सम्मान का दुरुपयोग करेंगे। मां की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए ही यह सम्मान म्यूजियम में स्वयं रखवा दें, ताकि लोगों को पिता के शौर्य गाथा की जानकारी मिले और वे उससे प्रेरणा ले सकें। -जैनुल हसन, परमवीर चक्र विजेता शहीद वीर अब्दुल हमीद के बड़े बेटे
वर्ष 2019 में दादी रसूलन बीवी का निधन हो गया था। इससे पहले दादी को जहां जाना होता था, मैं ही ले जाता था। बड़े पिता जी और अन्य लोगों की उनकी चिंता नहीं थी। निधन से पहले ही दादी ने मुझे और मेरे भाई को उत्तराधिकारी बनाया था। साथ ही वसीयतनामा में वावा को मिले सम्मान को लिखा-पढ़ी में मुझे सुपुर्द कर दिया। बड़े पिताजी ने मुख्यमंत्री पोर्टल तक पर शिकायत की थी। इस पर लिखित जवाब भी दिया था। इस सम्मान को कतई नहीं दूंगा। जरूरत पड़ी तो मानहानि का दावा भी करूंगा। - जमील आलम, परमवीर चक्र विजेता शहीद वीर अब्दुल हमीद के पोते