सुहवल। शासन की ओर से क्षेत्र में तीन वर्ष पूर्व मनचलों पर नकेल कसने एवं छात्राओं की सुरक्षा को लेकर विद्यालयों में शुरू की गई गरिमा बाक्स (शिकायत पेटिका) योजना शिक्षा विभाग एवं प्रशासन की उदासीनता के चलते जमानिया तहसील क्षेत्र में परवान चढ़ने से पहले ही फ्लाप साबित हो रही है। इससे स्कूल के बाहर और अंदर छात्राएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रहीं हैं। अभिभावकों के मुताबिक शासन की ओर से वर्ष 2019 में महिला सशक्तिकरण एवं बालिका सुरक्षा योजना की शुरुआत की गई थी। इसके तहत क्षेत्र के सभी माध्यमिक विद्यालयों, इंटर, हाईस्कूल और डिग्री कालेजों में प्राथमिकता के आधार पर गरिमा बाक्स लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य मनचलों और शोहदों पर प्रभावी तरीके से लगाम कसना था। किसी तरह की शिकायत पर छात्राएं अपना नाम लिखे बिना आरोपी की पहचान, उसका पता लिख इस गरिमा बाक्स में डालने की शासन की योजना थी, जिससे ऐसे मनचलों की पहचान कर उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा सके। लोगों ने बताया कि शासन की इस कवायद के बाद पुलिस महकमा एवं शिक्षा विभाग ने कुछ दिनों तक सक्रियता बनाए रखी। कुछ दिनों तक गरिमा बाक्स कालेजों की शोभा बढ़ाते रहे। यही नहीं इन गरिमा बाक्स में इन तीन सालों के अंदर एक भी शिकायती पत्र नहीं मिल सका। इसी उदासीनता के चलते शासन की महत्वपूर्ण यह योजना फाइलों में सिमट कर रह गई है। ग्रामीणों ने बताया कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार एक तरफ जहां फिक्रमंद है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस महकमा ,शिक्षा महकमा इसको लेकर बेपरवाह बना हुआ है। किसी भी स्कूल कालेज में गरिमा बाक्स दूर-दूर तक नजर नहीं आता। जिला विद्यालय निरीक्षक अशोक नाथ तिवारी ने बताया योजना के सक्रियता के लिए संबंधित कन्पत्र जारी कर इसकी सक्रियता बनाए रखने के निर्देश दिए जा रहे हैं, जिससे शासन की योजना का लाभ मिल सके।