गाजीपुर। गंगा खतरा बिंदु पार कर चुकी है। 5 गांवों में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है। लगभग दो दर्जन गांव गंगा-गोमती के पानी से घिर चुके हैं। प्रभावित गांवों में हाहाकर मचा है। ग्रामीणों की दिनचर्या पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गई है। शासन यहां की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। प्रशासन ने 10 नाव की व्यवस्था की है। डीएम आर्यका अखौरी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निरीक्षण करने पहुंची।
जिला मुख्यालय स्थित श्मशान घाट पर भी बाढ़ का पानी आ चुका है। इससे 300 मीटर पीछे टिनशेड में शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार सोमवार को दोपहर एक बजे गंगा का जलस्तर 63.420 मीटर पर स्थिर हो गया। जबकि खतरा बिंदु 63.105 मीटर है। रेवतीपुर क्षेत्र के निचले इलाकों के नगदीलपुर, नसीरपुर, वीरऊपुर व हसनपुरा में बाढ़ का पानी पहुंचा चुका है। इन गांवों की आबादी लगभग 15 हजार है। जबकि रेवतीपुर, रामपुर उर्फ साधोपुर, नारायणपुर, कल्याणपुर, अठहठा समेत खानपुर व औड़िहार क्षेत्र के दर्जनों गांव गंगा तथा गोमती नदी के बाढ़ से घिर गए हैं। जबकि जिले में लगभग 460 बीघा खेत जलमग्न हो चुके हैं। इनमें परवल, टमाटर, बैंगन, गोभी, भिंडी, नेनुआ, परवल, कोहडी, चरी, बाजारा, ज्वार, मक्कान, उड़द, मूंग, तिल, धान की फसल प्रमुख रूप से शामिल है। जबकि केला की खेती भी अब प्रभावित होना शुरू हो गई है। रेवतीपुर क्षेत्र में 150 बीघा फसल जलमग्न हुई है। जबकि खानपुर-औड़िहार क्षेत्र में 350 बीघा व भांवरकोल क्षेत्र में 10 बीघा खेत जलमग्न हुआ है। जिला प्रशासन की ओर से रेवतीपुर क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव नसीरपुर, हसनपुरा, अठहठा के लिए दो-दो तथा परमानंदपुर व नगदीलपुर के लिए दो नाव की व्यवस्था की गई है। ग्रामीण नाव के जरिए आवागमन कर सकें, इसके लिए नावों की व्यवस्था की गई है।
सिवान से गड़ेरियों ने किया पलायन
बाढ़ प्रभावित गांवों के सिवान में रहने वाले गड़ेरिये अपनी भेड़ाें के साथ पलायन कर चुके हैं। वहीं बाढ़ प्रभावित गांवों में बच्चों का पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। साथ ही किसानों के समक्ष पशुओं के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया है। हालांकि प्रशासन की ओर से चारे की व्यवस्था करने का दावा किया जा रहा है।
बाईपास मार्ग पर पानी, आवागमन बंद
गाजीपुर। रेवतीपुर-गहमर बाईपास मार्ग पर करीब दो मीटर तक पानी बाढ़ का पानी चढ़ चुका है। इससे आवागमन बंद कर दिया गया है। कुछ यही स्थिति रेवतीपुर-साधोपुर उर्फ रामपुर की है। उधर, एसडीएम सैदपुर रवीश गुप्ता ने पटना, कुसही, हथौड़ा, गोपालपुर, खरौना, सिधौना का निरीक्षण किया। बाढ़ शरणालय को सक्रिय करते हुए सभी राजस्व कर्मियों को मुस्तैद रहने का निर्देश दिया। उप जिलाधिकारी ने बताया कि अभी बाढ़ के पानी का असर फसलों पर है। अभी आबादी प्रभावित नहीं है। वाराणसी गाजीपुर के बॉर्डर पर स्थित गौरहट गांव बाढ़ से घिर गया है। आवागमन के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। तेतारपुर गांव के मुख्य मार्ग पर भी पानी आ चुका है। गौरी, गोरखा, गदनपुर, भुजाड़ी, अमेहता, नुरुद्वीनपुर, सिधौना, सूरजभानचक, मलहिया, खरौना, कुसही, हथौड़ा, गोपालपुर, पटना, औड़िहार गांव स्थित 300 बीघा खेत जलमग्न हो चुका है।
फोरलेन के किनारे पहुंचा बाढ़ का पानी
औड़िहार। सैदपुर क्षेत्र में गंगा-गोमती के बाढ़ के चलते लगभग डेढ़ सौ एकड़ से ज्यादा फसलें जलमग्न हो गईं हैं। बाढ़ का पानी वाराणसी-गाजीपुर राजमार्ग के किनारे तक पहुंच गया है। गंगा गोमती की संगम स्थली पटना में कई किलोमीटर तक जल ही जल दिखाई दे रहा है। संवाद
एक महीने में 45 बीघा भूमि गंगा में समाई
भांवरकोल। शेरपुर मुबारकपुर से लेकर गहमर सिवान तक कटान जारी है। दो बीघा भूमि गंगा में समा गई है। एक महीने में 45 बीघा भूमि कटान की भेंट चढ़ चुकी है। गंगा का पानी तटवर्ती इलाकों में फैलना शुरू हो गया है। कठार, आमघाट, नकटीकोल, रानीपुर, पखनपुरा होते हुए कबीरपुर-कुंडेसर तक पहुंच गया है। भांगड़ नाला के पास बोई गई टमाटर, बाजारा, मिर्चा की दस बीघा की फसल जलमग्न हो चुकी है।
नावों का सहारा ले रहे ले रहे लोग, विधायक ने लिया जायजा
मुहम्मदाबाद। गंगा के बाढ़ का पानी खेतों में फैलने लगा है। भांवरकोल विकास खंड के पचासी, सत्तर, छनबेइया के रास्ते में पानी आ जाने से लोगो को आने जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। जलस्तर बढ़ने से गंगा किनारे के गांवों शेरपुर, सेमरा, बच्छलकापुरा आदि गांवों के किसान खेतों मे बाढ़ का पानी आ जाने से मिर्च, टमाटर, गोभी की नर्सरी को उखाड़ कर सुरक्षित स्थानों पर ले जाने लगे हैं। वहीं क्षेत्रीय विधायक सुहैब उर्फ मन्नू अंसारी ने धर्मपुरा, फिरोजपुर, वीरपुर व पचासी का निरीक्षण किया। वीरपुर में नाविकों ने कहा कि पिछले दिनों बाढ़ में जो नाव लगी थी, उसकी पारिश्रमिक का भुगता नहीं हुआ है। विधायक ने उपजिलाधिकारी से मोबाइल पर बात करके बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों मे नाव की व्यवस्था करने और बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री देने के साथ ही पशुओं के चारे की व्यवस्था करने की मांग की। दूसरी तरफ पितृ पक्ष 18 सितंबर से प्रारंभ हो रहा है। पितृपक्ष से पहले ही गंगा में बाढ़ आ जाने से लोगों के समक्ष तर्पण व पिंडदान कहां करेगें, इसकी समस्या आ गई है।
पानी में डूब श्मशान घाट
जमानिया। गंगा में बाढ़ आने के कारण नगर के बलुआ घाट स्थित श्मशान घाट पूरी तरह डूब गया है। गंगा के तटवर्ती इलाकों रामपुर पट्टी, सरनाम खां, पाह सैयदराजा, कालनपुर, मलसा, देवरिया, पाह सैय्यदराजा, सब्बलपुर, मंझरीया, चितावनपट्टी, राघोपुर, जगदीशपुर, रघुनाथपुर बाड़, जीवपुर बाड़, सब्बलपुर बाड़, मतसा बाड़, देवरिया बाड़ सहित कई आबादी क्षेत्रों में बाढ़ आ जाता है। संवाद