किसानों के लिए बाढ़ किसी कहर से कम नहीं है। इन दिनों सबसे अधिक केले की खेती करने वाले किसान चिंतित है। रेवतीपुर क्षेत्र में बड़े स्तर पर केले की खेती होती है। यहां किसान कई-कई बीघा में केले की खेती करता है। किसानों का कहना है कि यदि बाढ़ का पानी केले की खेत में घुसा तो लाखों रुपये बर्बाद हो जाएंगे। पिछले साल भी केले का सैकड़ों बीघा खेती बाढ़ की चपेट में आ गया था। जिससे काफी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा था। किसानों का कहना है कि अब अगर थोड़ा सा पानी बढ़ता तो खेत में पहुंच गया होता। जिससे काफी नुकसान का सामना करना पड़ता। अभी पिछले साल का ही हम लोगों का भरपाई नहीं पाए हैं। अगर इस साल बाढ़ आ जाएगा तो हम लोग को कर्ज तले दब जाएंगे।
किसानों ने कहा कि फल अभी पूरी तरह से तैयार नहीं है लेकिन बाढ़ की डर की वजह से हम लोग फसल को जल्दी-जल्दी कटवा कर बेच रहे हैं ताकि कुछ पैसा मिल जाए। हालांकि बिक्री भी एक माह बाद चालू होना था लेकिन बाढ़ की डर की वजह से फल काटकर बेचने की मजबूरी है। क्योंकि केले की फसल बाढ़ में डूबने पर कोई मुवाअजा नहीं मिलता है।
इस साल भी रेवतीपुर के आस-पास करीब 500 बीघे में केले की खेती हुई है। इसमें एक बिगहा में कम से कम 60 से 70 हजार का खर्च होता है। किसान बताते हैं कि केले की एक पौधे की लागत 16 से 20 रुपए आता है। एक बिघा में 800 से 900 की संख्या में केले के पौधे लगाए जाते है। केले की खेती में प्रति पौधा 25 से 30 किलो तक फल का उत्पादन होता है।
शाम को तीन सेमी प्रति घंटा का घटाव हुआ दर्ज, बड़ी राहत
गाजीपुर। गंगा के उफान के पांचवे दिन जलस्तर में घटाव दर्ज किया गया। इससे तटवर्ती इलाके के लोग काफी राहत महसूस कर रहे हैं। दोपहर दो बजे तक गंगा का जलस्तर 62.340 मीटर था। जो चेतावनी बिंदु 61.550 मीटर से थोड़ा ऊपर है। दोपहर दो बजे के करीब गंगा के जलस्तर में तीन सेमी प्रति घंटा का घटाव दर्ज किया गया। जिससे रेवतीपुर और सैदपुर के विभिन्न गांवों में खेतों में भरा पानी लौटने लगा है।
मंगलवार को दिन भर गंगा के जलस्तर में घटाव ही रही। सुबह 8 बजे 62.490 मीटर पर गंगा का जलस्तर था। और, दिन में 10 बजे गंगा का जलस्तर 62.450 मीटर पर होने के साथ 2 सेमी प्रति घंटा का घटाव देखने को मिला था, जो दोपहर बाद 3 सेमी प्रति घंटा की वेग से घटना शुरू हो गया।