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कैसे प्रदूषित न हो गंगा, सीधे गिर रहा नालों का अवजल

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नगर के कलेक्ट्रेट घाट पर शहर का नाले का गंगा में गिरता गंदा पानी। - फोटो : GHAZIPUR
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गाजीपुर। जिले में गंगा निर्मलीकरण के नाम पर सरकारी कवायदों को पलीता लग रहा है। नदी में नालों के अवजल सीधे गिर रहे हैं। नदी में गिरने वाले इन दूूषित जल से जलचरों का जीवन भी खतरे में पड़ गया है। नमामि गंगे और गंगा रक्षा दल के जागरूकता कार्यक्रमों का लोगों पर नहीं पड़ रहा है। नतीजतन गंगा लगातार प्रदूषित होती जा रही है। जिले में नमामि गंगे और गंगा रक्षा दल के जागरूकता कार्यक्रम अब लोगों पर असर नहीं कर रहे। गंगा को प्रदूषणमुक्त करने की आवाज बंद हो गई है। ऐेसे में लगातार नालों का गंगा में गिर रहा अवजल गंगा को प्रदूषित करने में कसर नहीं छोड़ रहा। नवापुरा निवासियों के मुताबिक, गंगा में गिरते नाले से उठती दुर्गंध सबके लिए समस्या बनी हुई है। गंगा का निर्मलीकरण भाजपा सरकार के प्रमुुख एजेंडे में शामिल है। इसके लिए समय-समय पर बजट भी आवंटित हुआ, करोड़ों खर्च किए जाने के बाद भी नतीजा सिफर है। सरकारी अमले की लेटलतीफी से गंगा निर्मलीकरण योजना निर्धारित समय से आगे बढ़ती जा रही है। कुछ माह से शहर की गंदगी एवं कूड़े कचरे को गंगा में जाने से रोकने के लिए नालों पर जाली लगाई जा रही है। लेकिन अब तक छह नालों पर ही इसे लगाया जा सका है। हालांकि कचरा तो रोकने में कुछ हद तक सफलता मिली है लेकिन अवजल उसी तरह सीधे नदी में गिर रहा है। जिले में करीब 84 नाले गंगा में गिरते हैं। इसमें से 36 नाले अकेले शहर के हैं। खासकर नवापुरा घाट के पास स्थित नाला, कलेक्ट्रेट घाट के बगल से गंगा नदी में गिरने वाला नाला, ददरी घाट के पास से गंगा में गिरने वाले नालों समेत कई नालों का अवजल गंगा में गिर रहा है। गंगा में गिर रहे नालों के पानी को रोकने के लिए जलनिगम ने सर्वे का कार्य किया लेकिन उसे अमलीजामा पहनाना अभी बाकी है। नगर पालिका परिषद की चेयरमैन सरिता अग्रवाल ने बताया कि शहर के विभिन्न मुहल्लों में बहने वाले नालों का प्रदूषित जल सीधे गंगा नदी में न गिरे इसके लिए एसटीपी का निर्माण हो रहा है। परियोजना पूरा होने से पहले गंगा में दूषित जल को जाने से रोकने के लिए जाली लगाने का निर्णय लिया गया है।
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