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खरौना गांव में घुसा बाढ़ का पानी, छत पर ली शरण

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गंगा-गोमती संगम के मुहाने पर बसे खरौना गांव में सत्रह घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। कुछ ने छतों पर शरण ली है तो कुछ सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। बाढ़ के पानी में पशुओं का चारा और फसल डूब गई है। ग्रामीणों का कहना है कि बीते दो दिनों में गंगा की बाढ़ ने गिरजा यादव, केशव यादव, रामजन्म निषाद, मैनू निषाद, सुभाष नागर, कैलाश नगर, राकेश यादव और कांता निषाद के घरों को अपनी चपेट में ले लिया है। वहीं अंतिका निषाद, रामकेर निषाद, रामअवध निषाद, बिरजू नागर, रामदेव नागर, रामजग नागर, रामजी नागर, शेखर और लल्लन निषाद के घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। पूरे खरौना गांव की खेती गंगा और गोमती की तराई में होती है। पूरा तटीय क्षेत्र जलमग्न होने के कारण खेती से अब कोई आशा नहीं रह गई है। इससे यहां दर्जनों परिवारों के सामने रोजी-रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। नेशनल हाईवे से गांव को जोड़ने वाले एकमात्र मार्ग का आधा हिस्सा भी बाढ़ के पानी में समा चुका है। इससे प्राथमिक विद्यालय का आवागमन भी अवरुद्ध हो गया है। आकाश निषाद ने कहा कि खेत में पानी भर गया है। नावों चलाने पर रोक लगा दी गई है। अब कमाई का कोई जरिया नहीं बचा है। जीविकोपार्जन कठिन हो गया है। रमेश यादव ने बताया कि फसल और पशुओं का चारा डूब चुका है। हालत बदतर हो गई है। संपन्न लोगों ने बाहरी इलाकों में मकान बनवा रखा है। गरीबों को दूसरा कोई सहारा भी नहीं है। ग्राम प्रधान घूरन यादव ने कहा कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से बहुत अपेक्षाएं हैं। बाढ़ से बेघर लोगों के लिए आवास की मांग की थी। कुछ आया भी है। बाढ़ खत्म होते ही काम शुरू करा दिया जाएगा।
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