इस बार के सावन में चार सोमवार पड़ रहे हैं। सावन मास रविवार को शुरू होकर रविवार को ही समाप्त हो रहा है। सावन में भगवान शिव की विशेष पूजा, व्रत और अनुष्ठान रखे जाएंगे। भगवान शिव को समर्पित सावन के महीने में व्रत, दर्शन एवं पूजन से विशेष फल की प्राप्ति होती है। डढ़वल गांव के आचार्य वरुण कुमार त्रिपाठी ने बताया कि सावन का पहला सोमवार 26 जुलाई, दूसरा दो अगस्त, तीसरा नौ अगस्त और चौथा 16 अगस्त को पड़ रहा है। संकटी श्री गणेश चतुर्थी व्रत 27 जुलाई, नागपंचमी 28 जुलाई और कामदा एकादशी व्रत चार अगस्त को है। वहीं भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाने वाला प्रदोष व्रत पांच अगस्त तथा 20 अगस्त को रखा जाएगा। इसके अलावा हरियाली अमावस्या आठ अगस्त को है। इन्हीं दिनों में भोले भंडारी के भक्त भोले बाबा का विशेष दर्शन, पूजन एवं व्रत रखकर मनोवांछित फल प्राप्त कर सकते हैं। नागपंचमी 13 अगस्त को मनाई जाएगी। इसके अलावा सावन माह का प्रमुख पर्व रक्षाबंधन 22 अगस्त को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। पंडित वरुण ने बताया कि भक्तों को शिवजी की कृपा प्राप्त करने के लिए प्रात: काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान ध्यान से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए। सायं काल प्रदोष काल में भगवान शिव की पंचोपचार एवं षोडषोपचार पूजा करनी चाहिए। इस दौरान भगवान शिव को धतूरा, बेल पत्र, मदार की माला, भांग, ऋतु फल, दूध, दही, चीनी, मिश्री एवं मिष्ठान आदि अर्पण करना चाहिए। बताया कि आरोग्य सुख और व्याधियों से मुक्ति के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए। आर्थिक समृद्धि के लिए शिव स्तोत्र का पाठ करने के साथ ही गन्ने के पवित्र रस से भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए। कुंवारी कन्याओं को सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए सावन महीने के प्रत्येक सोमवार को व्रत रखना चाहिए। सोमवार, प्रदोष एवं शिव चतुर्दशी व्रत रखना विशेष फलदायी होता है लेकिन जिन जातकों की कुंडली में कालसर्प का योग है। उन्हें नागपंचमी के दिन शिव पूजा करके नाग-नागिन का जोड़ा भगवान शिव को अर्पित करना चाहिए।