ताड़ीघाट मऊ रेलखंड के पहले चरण के लिए अधिग्रहित जमीनों के मुआवजे में असमानता के आरोप के मामले में डीएम न्यायालय ने पिछले दिनों सुनवाई पूरी की थी। इसके बाद पत्रावलियों के निस्तारण का काम तेज हो गया है। सोमवार की दोपहर में न्यायालय ने सदर तहसील के दो अन्य गांवों झिंगुरपट्टी शहरी तथा देहात के 326 काश्तकारों की पत्रावलियों का निस्तारण कर दिया। इसके पहले संबंधित न्यायालय ने सदर तहसील के ही सुखदेवपुर गांव के 34 किसानों की पत्रावलियों का निस्तारण किया था। अब कार्यदायी संस्था तथा रेल विकास निगम लिमिटेड ने उम्मीद जताई है कि जिन गांव की पत्रावलियों का निस्तारण हो चुका है। वहां अब बहुत जल्द ही निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। ऐसे में परियोजना अपने निर्धारित समय से पूरा हो सकेगी। दूसरी तरफ अब जिस तरह से सक्षम न्यायालय ने तेजी से फाइलों का निस्तारण करना शुरू किया है उम्मीद है कि बहुत जल्द शेष गांवों की पत्रावलियां भी निस्तारित कर दी जाएगी। मालूम हो कि यह पहले चरण की परियोजना जिले की दो तहसीलों क्रमश: जमानिया के सात और सदर के 10 गांवों से होकर रेलवे लाइन गुजरनी है। इनमें 2783 काश्तकारों की 35.5310 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई थी। सर्किल रेट में असमानता को लेकर सोलह गांव के करीब छह सौ किसानों ने जरूरी पत्रावलियां रेलवे को देने से इंकार कर पिछले दो वर्ष पूर्व जिलाधिकारी के न्यायालय में अपील की थी। इसके कारण परियोजना के निर्माण कार्य पर असर दिखने लगा था। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि पत्रावलियों के निस्तारण में जिस तरह से तेजी आई है। अब पूरी उम्मीद है कि उक्त किसानों के द्वारा आवश्यक पत्रावलियां आरवीएनएल के मेदिनीपुर स्थित आफिस में जमा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इसके लिए विभागीय लोगों के साथ राजस्व विभाग के कर्मी तथा अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे। अब देखना है कि संबंधित किसान अपने पत्रावलियों के निस्तारण से कितना संतुष्ट होते हैं या फिर आगे एक बार पुन: न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हैं। इस संबंध में आरवीएनएल के परियोजना निदेशक सत्यम कुमार ने बताया कि सदर तहसील के दो अन्य गांवों झिंगुरपट्टी देहात तथा शहरी के किसानों के द्वारा दाखिल अपील को सक्षम न्यायालय ने खारिज कर दिया है। बताया कि इसके पहले सदर तहसील के ही सुखदेवपुर गांव के भी किसानों के द्वारा सर्किल रेट को लेकर दाखिल अपील खारिज हो चुकी है।