गाजीपुर। जनवरी के दस्तक देते ही ठंड और कोहरे की चादर में सुबह से शाम तक दिन लिपटा रहा है। ऐसे में सूरज के दर्शन भी दुर्लभ हो गये हैं। इससे पाला पड़ने की आशंका के साथ खेती करने वाले किसानों को बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा रह है। हालांकि, गेहूं की फसल को तो बेहतर होने का अनुमान लगाया जा रहा है, लेकिन आलू, मटर और सरसों की फसलों में रोग लगने का खतरा बढ़ गया है। अगर मौसम का मिजाज अगले तीन-चार दिनों तक और ऐसे ही बना रहा तो आलू की फसल का झुलसा रोग की चपेट में आना तय है।
वहीं हल्की फुल्की बारिश के कारण फूल झड़ने से सरसों की फसल भी प्रभावित होगी। क्योंकि माहू कीट का प्रकोप भी तेजी पकड़ लेगा। जानकारों का मानना है कि इस मौसम में नमी बढ़ने से गेहूं की फसल को तो फायदा होगा। लेकिन अन्य फसलें प्रभावित होंगी। कृषि विशेषज्ञ रोहित कुमार का कहना है कि झुलसा रोग दो प्रकार का होता है। अगैती झुलसा व पिछैती झुलसा। अगैती झुलसा दिसंबर महीने की शुरुआत में लगता है। वहीं पिछैती झुलसा रोग दिसंबर के अंत से जनवरी की शुरुआत में लगता है।इस समय आलू की फसल में पिछैती झुलसा रोग लगने की संभावना अधिक है। इससे आलू को ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। इस बीमारी में पत्तियां किनारे व सिरे से झुलसना प्रारंभ होती है। इस कारण पौधा पूरी तरह झुलस जाता है।
पाला से ऐसे करें बचाव
पाला विशेषकर दिसंबर तथा जनवरी के महीने में ज्यादा पड़ने की संभावना रहती है। पाला के प्रभाव से प्रमुख रूप से उद्यानिकी फसलें जैसे टमाटर,बैंगन, आलू, फूलगोभी, मिर्च, धनिया, पालक तथा प्रमुख रूप से मसूर, चना तथाकुछ मात्रा में गेहूं आदि के प्रभावित होने की ज्यादा संभावना रहती है विशेषकर जब यह फूल और फल की अवस्था में हो।
ऐसे में दिन में सिंचाई करें। सिंचाई रात्रि के दूसरे तथा तीसरे पहर में नहीं करें। पाला की आशंका होने पर फसलों तथा उद्यान की फसलों में घुलनशील गंधक 80 प्रतिशत डब्ल्यू पी का दो से ढाई ग्राम मात्रा को प्रति लीटर की दर से पानी में घोल बनाकर डेढ़ से दो सौ लीटर पानी में घोलकर फसलों के ऊपर प्रति एकड़ की दर से छिडक़ाव करें। इससे दो से ढाई डिग्री सेंटीग्रेड तक तापमान बढने से काफी हद तक पाला से बचाया जा सकता है।
पशुओं को ठंडी हवाओं से बचाएं
दिसंबर से फरवरी माह तक अधिक ठंड पडने के कारण पशु तथा बछड़ों आदि को भी रात्रि के समय घरों के अंदर बांधें तथा उन्हें बोरे तथा जूट के बोरे तथा टाट-पट्टी से ओढ़ाकर ठंठ से बचायें। इसी प्रकार मुर्गी तथा बकरी घर को भी चारों तरफ से पॉलीथिन की सीट या टाट-पट्टी आदि से बांधकर ठंडी हवाओं से चारों तरफ से बचाएं।