डीएपी खाद के अभाव में रबी की बुआई पिछड़ती जा रही है। एक तरफ जहां किसान खेतों को तैयार करने में जुटे हुए हैं। वहीं डीएपी नहीं मिलने उनकी चिंता बढ़ती जा रही है। समय से अगर डीएपी नहीं मिलती है तो खेतों की नमी चली चली जाएगी। वहीं दोबारा खेत की सिंचाई करना पड़ेगा। स्थिति यह है कि क्षेत्र में साधन सहकारी समिति मलसा पर अब तक एक भी बोरी डीएपी खाद नहीं है, जिससे किसानों में रोष व्याप्त है। यही हाल साधन सहकारी समिति देवरिया, ढढनी, बेटाबर की है। किसान प्रतिदिन समिति का चक्कर लगाकर वापस चले जा रहे हैं। जबकि जिले के आला अधिकारी सिर्फ टालमटोल और आए दिन डीएपी की मात्र समितियों पर होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन हकीकत कुछ अलग है। ऐसी स्थिति में किसान बाध्य होकर ऊंचे दामों पर डीएपी खरीदने को विवश हैं। किसान रविंद्र राय, बेचन यादव, बसावन चौरसिया, मेराज अंसारी आदि ने डीएपी खाद जल्द से जल्द साधन सहकारी समितियों पर उपलब्ध कराने की मांग की है।