जिले के एक पेट्रोल पंप ट्रैक्टर में डीजल भरवाता चालक। संवाद
गाजीपुर। खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ जिले के किसानों की चिंता बढ़ गई है। एक ओर किसान धान की नर्सरी तैयार करने में जुटे हैं तो दूसरी ओर केले और सब्जियों की फसलों की सिंचाई का समय है। ऐसे में किसानों का आरोप है कि पेट्रोल पंपों पर डीजल और पेट्रोल सीमित मात्रा में दिया जा रहा है, जबकि कई पंपों पर ईंधन खत्म होने के कारण आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है। इससे फसलों के प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। जिले में करीब डेढ़ लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती होती है। इसके अलावा लगभग 40 हजार हेक्टेयर में केले और 1.65 लाख हेक्टेयर में विभिन्न सब्जियों की खेती की जा रही है। इन फसलों की सिंचाई और दवा छिड़काव के लिए बड़ी संख्या में किसान डीजल इंजन और पेट्रोल चालित मशीनों पर निर्भर हैं। किसानों का कहना है कि गैलन या डिब्बा लेकर पेट्रोल पंप पहुंचने पर उन्हें पेट्रोल दो लीटर और डीजल 10 लीटर तक ही दिए जाने की जानकारी दी जा रही है। वहीं कई बार पंपों पर डीजल और पेट्रोल उपलब्ध न होने के कारण उन्हें दूसरे स्थानों पर भटकना पड़ रहा है। औड़िहार कला निवासी पंकज सिंह ने बताया कि लौकी, नेनुआ और करैला जैसी सब्जियों की सिंचाई के लिए बार-बार डीजल की जरूरत पड़ती है, लेकिन सीमित मात्रा मिलने से परेशानी हो रही है। जौहरगंज निवासी पिंटू निषाद ने कहा कि धान की नर्सरी को लगातार पानी की जरूरत होती है। कई बार पंपों पर ईंधन न मिलने से दूसरे पंपों का सहारा लेना पड़ता है। वहीं रेवतीपुर निवासी बृजेश राय ने बताया कि केले की फसल में सिंचाई और दवा छिड़काव दोनों प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि जिला पूर्ति विभाग ने जिले के 143 पेट्रोल पंपों पर डीजल और पेट्रोल की पर्याप्त उपलब्धता का दावा किया है।