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Ghazipur News: सरसों की खेती पर किसान अधिक दिखा रहे दिलचस्पी

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मौधा। अच्छी वर्षा न होने की वजह से जो किसान धान की खेती नहीं कर पाए थे। वे अपने खाली पड़े खेतों में तिलहन व दलहन की खेती करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इधर सरसों की खेती पर किसानों ने कुछ अधिक ही दिलचस्पी दिखाई है। क्योंकि पिछले सीजन में सरसों का अच्छा रेट मिला था। इसलिए इस वर्ष भी अधिकांश किसान सरसों की खेती में ही अपना भाग्य आजमा रहे हैं। गेहूं की बुवाई अधिकतर वही किसान कर रहे हैं। जो पिछले सत्र में धान की खेती कर पाए थे। क्योंकि क्षेत्र के देवकली पंप कैनाल नहर के आसपास के क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलने के कारण धान की तो अच्छी खेती हो गई थी। लेकिन दूरस्थ क्षेत्रों में जहां सिंचाई के लिए पानी का अभाव था, और पर्याप्त वर्षा भी नहीं हुई थी। वहां धान की खेती करने से वंचित रह गए किसानों ने बताया कि इस बार क्षेत्र में 50 फ़ीसदी से भी कम धान की फसल हुई है। इसलिए खाली पड़े खेतों में किसानों ने बढ़ियां वैरायटी के सरसों की फसल लगा दी है। क्योंकि किसानों का कहना है कि धान की खेती न कर पाने से उन्हें जो नुकसान हुआ था। सरसों की खेती करके वे उसकी थोड़ी बहुत भरपाई कर सकते हैं। इसके अलावा दलहन की फसल जैसे चना, मसूर और मटर आदि की खेती में भी किसानों की दिलचस्पी ज्यादा दिखाई पड़ रही है। क्योंकि कुछ किसानों का कहना है कि धान की रोपाई के समय सिंचाई की जो समस्या पहले थी। वह अभी भी बरकरार है। इसलिए गेहूं की फसल की सिंचाई भी नहीं हो पाएगी। इसलिए सरसों आदि की खेती करना ही उनकी मजबूरी बन गई है। रोहित सिंह, सहायक विकास अधिकारी (कृषि रक्षा) सैदपुर ने बताया कि विकास खंड क्षेत्र में किसानों को नि:शुल्क वितरण के लिए दलहन में मसूर का बीज, चना और तिलहन में सरसों वितरित किया गया है। दलहन और तिलहन की बुवाई का उपयुक्त समय 15 नवंबर तक माना गया है।
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