गाजीपुर। पेट संबंधित मरीजों को जांच के लिए गैर जनपदों के सरकारी अस्पतालों और निजी जांच केंद्रों का सहारा अब नहीं लेना पड़ेगा। अप्रैल माह में जिला अस्पताल में एंडोस्कोपी की जांच शुरू हो जाएगी। राजकीय मेडिकल कालेज प्रशासन सुविधा को शुरू करने में जोर-शोर से लग गया है। प्रशिक्षण के लिए चिकित्सकों को बीएचयू भेजने के लिए पत्र भेजा गया है। साथ ही छह-छह माह के इस प्रशिक्षण के लिए दो डॉक्टरों का चयन कर नाम भी भेज दिया गया है।
पेट से जुड़ी अनेक बीमारियों में अल्सर, कैंसर, खून की उल्टी होने की वजह, छाती-पेट में दर्द, भोजन का नहीं पचना आदि के मरीजों को जांच के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। ऐसे में अस्पताल में तैनात चिकित्सक मरीजों को उपचार के लिए बीएचयू रेफर कर देते हैं। वजह जिला अस्पताल में एंडोस्कोपी जांच की सुविधा नहीं है।
मरीजों को हो रही परेशानी को देखते हुए राजकीय मेडिकल कालेज प्रशासन ने इस जांच की व्यवस्था को शुरू करने के लिए कवायद तेज कर दी है, जिससे निजी केंद्रों और गैर जनपदों का चक्कर मरीजों को न काटनी पड़े। इसके लिए यहां के दो चिकित्सकों डा. धनंजय एवं डा. आनंद कुमार को प्रशिक्षित करने के लिए बीएचयू और शासन को पत्र भेजा गया है।
राजकीय मेडिकल कालेज के प्रधानाचार्य प्रोफेसर डा. आनंद कुमार मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2023 के अप्रैल माह से एंडोस्कोपी जांच की सुविधा मिलने लगेगी। दो चिकित्सकों को प्रशिक्षित करने के लिए पत्र भेजा गया है। उम्मीद है, जल्द ही इस पर मुहर लगेगी।
दो हजार से अधिक करना पड़ता है भुगतान
एंडोस्कोप एक लंबी, पतली और लचीली ट्यूब होती है। इसके एक सिरे पर लाइट और कैमरा लगा होता है। कैमरे की मदद से ली गई तस्वीरें कंप्यूटर स्क्रीन पर भेजी जाती हैं। इस प्रक्रिया को ही एंडोस्कोपी कहते हैं। गैर जनपदों में निजी जांच केंद्रों पर जांच कराने के लिए मरीजों को दो हजार रुपये का भुगतान करना पड़ता है। जबकि सरकारी अस्पतालों में शासन द्वारा निर्धारित शुल्क ही देना पड़ता है। ऐसे में देखा जाए तो आवागमन करने से लेकर जांच कराने तक काफी खर्च हो जाता है और मरीजों को आर्थिक दंश भी झेलना पड़ता है।