थाना क्षेत्र के धीरजी जोत गांव के पास तेज रफ्तार वाहन ने रविवार की देर शाम दो साइकिल सवार किशोरों को टक्कर मार दी। घायलों को उपचार के लिए परिवार के लोग मनिहारी सीएचसी ले गए, जहां इलाज के बजाए सीधे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। लेकिन जिला अस्पताल में तैनात डॉक्टर ने मुकदमा दर्ज कराने के बाद ही उपचार कराने का हवाला देते हुए बाहर से दवा लेने के लिए पर्ची लिखकर भेज दिया।
परिजन थकहार कर घर लेकर आ गए। सोमवार को थाने पर तहरीर देकर जखनिया सीएचसी पहुंचे और मेडिकल करने की बात कही। इस पर पुलिस कर्मी की मौजूदगी में मेडिकल कराने का हवाला देते हुए वापस कर दिया। देर शाम थाने से पहुंचे होमगार्ड के आने के बाद घायलों का मेडिकल और उपचार हुआ।
धीरजी जोत गांव निवासी आनंद कुमार (17) और ऋषभ कुमार (16) दोनों दो साइकिल से गेहूं लेकर सिखड़ी आटा चक्की मशीन पर शाम छह बजे गए थे। वहां से दोनों घर लौट रहे थे। पीछे से तेज रफ्तार वाहन ने दोनों साइकिल सवार को टक्कर मार दी। इसके बाद दोनों साइकिल सवार खेत में गिर गए थे। इस घटना मेें दोनों को सिर और हाथों में चोट आई थी। घायल आनंद के चाचा अशोक राम ने बताया कि दोनों घायलों को एंबुलेंस से मनिहारी सीएचसी ले जाने पर उपचार नहीं किया, बल्कि जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
दोनों घायलों को एंबुलेंस से रात 8.30 बजे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां तैनात चिकित्सक द्वार उपचार करने के बजाए मुकदमा दर्ज कराने की बात कहने लगे। जब कहा गया कि आप दोनों का इलाज करिए तो उन्होंने एक सादी पर्ची पर दवा लिखकर कहा कि बाहर से दवा लेकर दे दिजीए। इधर एंबुलेंस भी छोड़कर चली गई। दोनों घायलों को निजी एंबुलेंस से घर लाया गया।
दूसरे दिन सुबह थाने में तहरीर देकर दोनों घायलों को जखनिया सीएचसी लाया। फर्मासिस्ट बसंत ने कहा कि परिवार के लोग मेडिकल कराने के लिए कह रहे थे। ऐसे में बिना पुलिस की मौजूदगी में मेडिकल न होने की बात कही गई। शाम में होमगार्ड के आने के बाद दोनों का मेडिकल किया गया। इस संबंध में मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रोफेसर डा. आनंद मिश्रा ने बताया कि पूरे मामले की जांचकर उस समय तैनात डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।