फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कर्म ऐसा करो, जो धर्म हो : माधव कृष्ण

विज्ञापन
विज्ञापन
गाजीपुर। मानव धर्म प्रसार की शाखा इस्लामाबाद (महाराजगंज) में तीसरा वार्षिक धर्म सम्मेलन प्रार्थना के साथ प्रारंभ हुआ। आश्रम के संत श्रीभोला दास महाराज ने झंडारोहण किया गया। गुरु वंदना भीम जी ने प्रस्तुत की। मुख्य वक्ता माधव कृष्ण ने कहा कि जब आप अपने आप को जान जाएंगे, तभी विद्वान कहे जाने के अधिकारी होंगे। कबीर दास जी हमारी गुरु परंपरा के पुरोधा हैं, अहंकार लाख झटका खाने के बाद भी अपने को स्थापित करने का प्रयास करता है। आज हम जातियों, उपजातियों में बंटे हैं, सोच लीजिए कि हमारा समाज किस दिशा में जा रहा है। पुस्तकों के संक्षिप्त ज्ञान से हम मुक्त नहीं होते, तो ज्ञान कैसे मिले ? यह सोचने की बात है। असली ज्ञानी तो कबीर थे, जो एक दम पढ़े- लिखे नहीं थे। वासुदेव का अर्थ है, जो सबके हृदय में वास करता है। गुरु वचन, शास्त्रोक्ति और आत्मानुभूति ही सत्य है। कर्म ऐसा करो जो धर्म हो। जब हम सत्य के लिए काम करेंगे वही धर्म है। इसी क्रम में मुख्य रूप से गुलाब जी ने कहा कि हम सब दूसरों को सुख देंगे, तभी हमें सुख प्राप्त होगा। वाणी पर उन्होंने खास जोर देते हुए कहा कि हमें एक दूसरे से बोलना और सीखना चाहिए। श्रीकांत ने कहा कि संत की संगत मात्र से जीव का उद्धार हो जाता है। अन्यथा प्राणी सद्मार्ग के बिना भटकता रहता है। शिवलोचन ने कहा कि बिना गुरु के कोई ज्ञान नहीं होता। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में गुरु का होना आवश्यक है। उपदेश और वचन हम लोगों के जीवन में कल्याणकारी हैं। हम अपने परिवार के बारे में तो सोचते हैं, लेकिन समाज के विकास के बारे में नहीं सोचते, हमारा दायित्व है कि सोचें और जरुर विचार करें। महापुरुष की बात मान लेने से आदमी का बहुत बड़ा सुधार होता है। जमानिया प्रभारी सदानंद जी ने कहा कि जितने भी आश्रम पर आने वाले लोग होते थे, महाराज जी सबसे एक ही प्रश्न किया करते थे कि घर-घर में आग लगी है। कौन बुझाएगा ? संगत का बहुत महत्व होता है। सभा में रामानंद प्रभारी रामअवध, अजय, विरेंद्र, अनिरूद्ध, अच्छेलाल आदि लोग उपस्थित रहे। संचालन तेजबहादुर ने किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें