जनपद में पुरुष नसबंदी का आंकड़ा शून्य है। स्थिति यह की लक्ष्य के सापेक्ष अप्रैल माह से लेकर अब तक एक भी पुरुष लाभार्थी की नसबंदी नहीं हो सकी है। यही नहीं जून में मात्र छह महिलाएं लाभान्वित हुई हैं। ऐसे में परिवार नियोजन का यह महत्वपूर्ण अभियान फ्लाप होता दिख रहा है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग संक्रमण का दंश बताकर पल्ला झाड़ रहा है। एक तरफ सरकार ने जहां जनसंख्या नियंत्रण को लेकर तैयारी शुरू कर दी है। वहीं स्वास्थ्य महकमा परिवार नियोजन के महत्वपूर्ण अभियान का सफल क्रियान्वयन कराने में असफल हो रहा है। स्थिति यह है कि पुरुष नसबंदी में जनपद फिसड्डी हो चुका है। वहीं तीन माह अप्रैल, मई और जून में मात्र 63 महिला लाभार्थी ही लाभान्वित हो सकी हं। जबकि जून में मात्र छह महिला लाभार्थी की नसबंदी हुई। ऐसे में अगर शासन की ओर दिए गए लक्ष्य पर नजर डाली जाए तो 50 पुरुष लाभार्थी के नसबंदी का लक्ष्य रखा गया है। वहीं महिला नसबंदी के लिए एक वर्ष का 866916 का लक्ष्य निर्धारित किया है। ऐसे में अब तक स्वास्थ्य विभाग 63 महिलाओं की नसबंदी करा सका है। विभाग लक्ष्य पूरा न होने के लिए कोरोना संक्रमण को वजह मान कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है।