गाजीपुर। डाकघर की सभी बचत योजनाओं में अब मोबाइल लिंक कराना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे डाकघर बचत योजनाओं में जमा राशि और भी सुरक्षित हो जाएगी। जिनके खातों में मोबाइल नंबर लिंक नहीं है, उन्हें केवाईसी अपडेट कराकर मोबाइल नंबर से लिंक कराना होगा। इसे कराने के लिए 31 मार्च की तिथि तय की गई है।
डाकघरों में खुल रहे नए खातों और एनएससी-केवीपी में मोबाइल नंबर अनिवार्यत: लिया जाता है, लेकिन तमाम ऐसे पुराने खाते और एनएससी-केवीपी भी हैं जिसमें अभी तक मोबाइल नंबर लिंक नहीं किया गया है। 31 मार्च तक अपने खातों में मोबाइल नंबर लिंक न कराने वाले खाताधारक अपने खातों से न तो रुपये निकाल पाएंगे, न ही जमा कर पाएंगे और न ही खाता को बंद कर पाएंगे। डाकघर बचत योजनाओं में बचत खाता, आरडी, टीडी, एमआईएस, पीपीएफ, सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम, सुकन्या समृद्धि योजना, एनएससी, केवीपी शामिल हैं।
वाराणसी परिक्षेत्र में एनएससी-केवीपी के अलावा लगभग 30 लाख खाते संचालित हैं। मोबाइल लिंक कराने के लाभ के बारे में बताते हुए पोस्टमास्टर जनरल कृष्णकुमार यादव ने कहा कि इससे ई-बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग जैसे आधुनिक डिजिटल बैंकिंग सेवाओं का लाभ लिया जा सकता है। समय-समय पर खातों में हुए लेन-देन की जानकारी भी मैसेज के माध्यम से घर-बैठे प्राप्त होगी। साथ ही इससे किसी भी प्रकार के गबन से भी बचा जा सकता है।
खातों में मोबाइल नंबर लिंक होने से जहां टोल-फ्री नंबर का प्रयोग कर आईवीआरएस सेवा के माध्यम से खाते के विषय में जानकारी प्राप्त की जा सकेगी वहीं हाल में शुरू की गई ई-पासबुक सेवा का प्रयोग कर खातों में हुए लेन-देन की जानकारी एवं मिनी स्टेटमेंट भी ऑनलाइन प्राप्त किए जा सकेंगे।
उन्होंने बताया कि अब डाकघरों में भी एनईएफटी की सुविधा उपलब्ध है, जिससे लोग बैंक खातों में राशि ट्रांसफर कर सकते हैं। इसमें न्यूनतम सीमा एक रुपये तथा अधिकतम 15 लाख रुपये है। डाकघर खातों में धनराशि के ट्रांसफर के लिए देश के सभी डाकघरों के लिए केवल एक ही आईएफएससी कोड IPOS0000DOP है। पूरे भारत के सभी डाकघरों का एक ही आईएफएससी कोड होने से ग्राहकों को प्रत्येक डाकघर का अलग से आईएफएससी कोड नहीं ढूंढना पड़ेगा।