करंडा थाना क्षेत्र के तुलापट्टी गांव में डिप्थीरिया (गलघोंटू) से दो सगे भाइयों की मौत से कोहराम मचा हुआ है। छह सितंबर को दोनों की तबीयत खराब होने पर पिता जिला अस्पताल ले गया। जहां डॉक्टरों ने टीका लगवाने की बात कही, लेकिन पिता बच्चों को इलाज के लिए वाराणसी लेकर चला गया। जहां 20 सितंबर को बड़े पुत्र और 23 सितंबर को छोटे की मौत हो गई। अब परिवार टीका न लगवाने की जिद पर विलाप कर रहा है। सीएचसी के प्रभारी चिकित्साधिकारी ने कहा कि समझाने के बाद भी बच्चों के पिता ने एक न सुनी।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव निवासी कन्हैया बिंद की तीन संतानों में एक पुत्री और दो पुत्र थे। बीते छह सितंबर को दोनों पुत्र सूर्यांश (4) और ढाई वर्षीय शिवा अचानक बीमार हो गए। बुखार और उल्टी होने पर गांव के फर्जी चिकित्सकों से दवा लेकर बच्चों को देने लगे। गांव की आशा ने इसकी जानकारी करंडा सीएचसी के चिकित्साधिकारी को दी। जिस पर डॉ. अभिनव सिंह आठ सितंबर को दोनों बालकों को उपचार के लिए जिला अस्पताल ले गए। जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उनको टीका लगाने की सलाह पिता को दी। पिता ने इससे मना कर दिया और बच्चों को बीएचयू इलाज के लिए लेकर चले गए। वहां डॉक्टरों ने टीका लगवाने को कहा तो परिजन निजी अस्पताल में इलाज कराने लगे। जहां 20 सितंबर को बड़े पुत्र सूर्यांश की मौत हो गई। ठीक तीन दिन बाद 23 सितंबर को छोटे पुत्र शिवा की भी मौत हो गई।
बच्चों के पिता कन्हैया बिंद ने बिलखते हुए बताया कि पुत्री को सभी टीके लगे थे। कई वर्षों बाद दोनों पुत्रों का जन्म हुआ था। टीके से उनको बुखार आएगा और दर्द होगा, इसी डर से प्यार के कारण टीका नहीं लगवाया था। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग गांव के सभी बच्चों का टीकाकरण करा रहा है।