सैदपुर क्षेत्र के कई गांवों में लंपी बीमारी ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। इस बीमारी की चपेट में आकर एक ओर जहां कई पशुओं ने दम तोड़ दिया है वहीं दर्जनों गाय मरणासन्न स्थिति में पड़ी हैं। अपने पशुओं की ऐसी हालत देखकर पशुपालकों में हड़कंप मचा हुआ है।
सैदपुर विकास खंड के फत्तेपुर गांव में राजदेव राजभर की बछिया मरणासन्न स्थिति में है। वहीं उनके पड़ोसी चंद्रदेव राजभर, गोरखनाथ राजभर और लालजी राजभर की गाय लंपी वायरस की चपेट में आ चुकी हैं। नुरदीनपुर गांव के दुर्गा यादव की गाय दम तोड़ चुकी है। इसी गांव के विनोद यादव की दो गाय, संगीता देवी की एक, उदय प्रताप सिंह की एक और सुरेंद्र तिवारी की एक गायें इस घातक बीमारी की चपेट में आ चुकी हैं।
जबकि इसी गांव के संतोष सिंह की दुधारू गाय भी मरणासन्न पड़ी हुई है। अमेहता गांव के कैलाश नाथ श्रीवास्तव ने बताया कि उनकी एक गाय के अलावा उनके गांव के विक्रमा प्रजापति और रामाधार यादव की गायों ने दाना पानी बंद कर दिया है। यहीं के नाथू यादव की गाय ने इसी रोग की चपेट में आकर दम तोड़ दिया है। पशुपालकों ने बताया कि खानपुर और सिधौना स्थित पशु चिकित्सा केंद्रों से पशु चिकित्सकों ने टीका लगाना तो दूर अभी तक कोई झांकने भी नहीं आया है। ऐसे में वे प्राइवेट डाक्टरों से ऊंचे दामों पर अपने पशुओं का इलाज कराने को विवश हैं।
ऐसे रुकेगा संक्रमण
मौधा। पशु चिकित्सा अधिकारियों ने बताया कि आंवला, अश्वगंधा, गिलोय या मुलेठी में से किसी भी एक की 20 ग्राम मात्रा को लेकर गुड़ के साथ लड्डू बनाएं, और उसे सुबह शाम पशु को खिलाना चाहिए। इसके अलावा तुलसी का एक मुट्ठी पत्ता, दालचीनी और सोंठ पाउडर पांच ग्राम और काली मिर्च 10 नग को गुड़ में मिलाकर सुबह-शाम पशु को खिलाना चाहिए। पशुशाला में गोबर के कंडे में गूगल, कपूर, नीम के सूखे पत्ते और लोबान डाल कर धुंआ करना चाहिए। पशु को नहलाने के लिए 25 लीटर पानी में एक मुट्ठी नीम की पत्ती का पेस्ट और 100 ग्राम फिटकरी मिलाकर प्रयोग करना चाहिए। फिर स्नान के बाद उसके शरीर को साफ पानी से धो देना चाहिए।
सैदपुर विकास खंड के स्थानीय पशु चिकित्सा केंद्र पर 5500, सिधौना में 3500, खानपुर में 4000, भदैला में 2300, अलायचक में 500, गौरी में 3000 और सौना में 5800 लंपी वायरस की वैक्सीन उपलब्ध करा दी गई है। लंपी जैसी घातक बीमारी को लेकर विभाग पूरी तरह चौकन्ना है। किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
- डा. एसके रावत, सीवीओ गाजीपुर