मौधा। सादात विकासखंड के मंगारी गांव की प्रधानाध्यापिका रहीं शीला सिंह के हंसते खेलते परिवार की खुशियां कोरोना ने छीन ली। पति एवं दो बेटों की बसी बसाई गृहस्थी उजड़ गई है। शीला के निधन से पूरा गांव मर्माहत है। रुंधे गले से शशिकांत सिंह ने बताया कि कोरोना ने उनके पूरे परिवार पर अटैक कर दिया था। पत्नी शीला, दो बेटों विवेक मणि सिंह और उत्साह मणि सिंह के अलावा वह खुद भी छह अप्रैल की जांच में संक्रमित थे। पूरा परिवार अपने घर में ही आइसोलेट होकर कोविड प्रोटोकाल का पालन कर रहा था। इस बीच प्रशासन की सख्ती के चलते 13 अप्रैल को जिला मुख्यालय पर होने वाली चुनावी ट्रेनिंग में शीला को जाना पड़ा। एक सप्ताह बाद घर के सारे लोग अगली जांच रिपोर्ट में निगेटिव हो गए लेकिन ट्रेनिंग से लौटने के बाद 14 अप्रैल को ही शीला की हालत बिगड़ गई। रात उन्हें सांस लेने में तकलीफ हुई। 15 अप्रैल को वाराणसी के बीएचयू ले जाया गया बेड खाली न होने पर प्राइवेट हास्पिटल का सहारा लेना पड़ा। वहां 17 अप्रैल की रात शीला ने अंतिम सांस ली। शशिकांत ने बताया कि मृतक आश्रित के कोटे और पेंशन प्रक्रिया के लिए विभाग ने कोई संपर्क नहीं किया। सरकार से मिलने वाले मुआवजे के लिए विभाग ने उनसे संपर्क किया था जिसकी सारी औपचारिकताएं पूरी कर दी गई हैं।