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जिले में शवों के जलप्रवाह पर लगी थी रोक

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करंडा। जिला प्रशासन की ओर से पूर्व में ही शवों के जल प्रवाह पर रोक लगा दी गई थी। ऐसे में ग्रामीणों में चर्चा है कि दस दिन पूर्व जमानिया के दैत्रावीर बाबा गंगा घाट पर बिहार प्रांत के तीन जनपद भभुआ, रोहतास एवं सासाराम से आए शवों का लकड़ी न मिलने पर जल प्रवाह कर दिया गया होगा। कुछ समय बाद शवों के पानी में उतराने के बाद पूर्वा हवा के चलते शव पश्चिमी किनारे की तरफ लग गए होंगे। धरम्मरपुर गंगा घाट के किनारे पानी कम होने की वजह से शव धारा में नहीं बह पाए और एक जगह किनारे एकत्र हो गए। गंगा के तटवर्ती इलाकों में शामिल करकटपुर गांव निवासी पप्पू यादव ने बताया कि पिछले दस दिनों से लगातार शव गंगा में बह रहे थे, लेकिन पूर्वा हवा के कारण दो दिन से यह किनारे लगे हैं। पुरैना गांव निवासी मल्लाह गोविंद निषाद ने बताया कि दो दिनों से धरम्मरपुर गंगा घाट के किनारे अनगिनत शव लगे हुए हैं, जिससे दुर्गंध आ रही है। करकटपुर गांव निवासी राम निषाद ने बताया कि गंगा के किनारे खेत होने से हमेशा आवागमन रहता है। पिछले कुछ दिनों से गंगा में बहुत अधिक संख्या में शव बहते दिखाई पड़ रहे थे। धरम्मरपुर निवासी केदार निषाद और सौदागर चौधरी ने बताया कि करीब दस दिन जमानिया के दैत्रावीर बाबा गंगा घाट पर काफी संख्या में बिहार के तीन जिलों से शव आए हुए थे। लकड़ी न मिलने की स्थिति में अंतिम संस्कार करने की जगह शवों का जलप्रवाह कर दिया था। हालांकि जिला प्रशासन जेसीबी और पोकलेन से गड्ढा खोदकर जितने शवों को दफना रही है, उतने ही और शव उतराकर घाटों के किनारे लग जा रहे हैं।
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