मोक्षदायिनी मां गंगा की लहरों में समाए अपने लाल के चेहरे को देखने के लिए मां की ममता आंखों से आसू के रूप में बह रही थी। हादसे से तीन घरों पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा कि उसे ताउम्र भुलाया नहीं जा सकेगा। पिता की आंखें दरवाजे पर आने वाले लोगों के चेहरों पर टिकी हुईं थीं। उनकी जुबान पर सिर्फ एक ही बात थी कि पुत्र कहां गया। यह हालत गंगा में गेंद पकड़ने के दौरान डूबे सरफराज, मुकेश और किशन यादव के परिजनों की थी। वहां मौजूद हर कोई इस घटना से काफी दुखी था।
गंगा में डूबे किशन के पिता राजेंद्र यादव गोरा बाजार में ही चाय की दुकान कर अपने परिवार की जीविका चलाते हैं। घटना से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया। बिलखने से वहां मौजूद हर किसी की आंख नम हो गई। उसका पता अभी न चलने से ग्रामीण परिजनों को सांत्वना देने में जुटे रहे। मृतक मुकेश के पिता पप्पू यादव किसान हैं। मृतक दो भाइयों में सबसे बड़ा था।
मुकेश दोस्तों के साथ वॉलीबॉल खेलने गया था, उसे तैरना भी नहीं आता था। एनडीआरएफ की टीम ने जब मुकेश का शव पानी से बाहर निकाला तो वहां मौजूद परिवार के लोग दहाड़े मारकर रोने लगे। सरफराज का शव देखकर परिजन रोने-बिलखने लगे। घटना स्थल पर मौजूद लोगों की आंख भी भर आई। ग्रामीण सांत्वना देकर उन्हें शांत कराने में जुटे रहे।